America venezuela conflict : अमेरिका ने शुक्रवार तड़के वेनेजुएला में एक बड़ा सैन्य अभियान चलाने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर देश से बाहर ले जाया गया है। यह कदम अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों में अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है। वेनेजुएला की राजधानी कराकास में शुक्रवार सुबह जोरदार धमाकों और सैन्य विमानों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने ऑपरेशन से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
अमेरिका ने हमला क्यों किया?
भारतीय अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई कई महीनों से चल रहे अमेरिकी दबाव का नतीजा है। जैसे
- नार्को-टेररिज्म के आरोप
अमेरिका लंबे समय से निकोलस मादुरो पर नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का नेतृत्व करने का आरोप लगाता रहा है। अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में कोकीन अमेरिका भेजी जा रही थी, जिसमें सरकारी संरक्षण था। अमेरिका पहले ही मादुरो के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर चुका है।
- कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती
2025 के मध्य से अमेरिका ने कैरेबियन सागर में युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर और लड़ाकू विमान तैनात किए थे। इसे दशकों में इस क्षेत्र की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती बताया गया। अमेरिका पहले समुद्र में संदिग्ध ड्रग तस्करी से जुड़े जहाजों को निशाना बना रहा था, लेकिन हालिया कार्रवाई में सीधे वेनेजुएला की जमीन पर सैन्य ऑपरेशन किया गया।
- कड़े प्रतिबंध और तेल पर दबाव
अमेरिका ने वेनेजुएला पर आर्थिक प्रतिबंध और सख्त कर दिए। कई तेल टैंकर जब्त किए गए और वेनेजुएला के तेल निर्यात को लगभग रोक दिया गया। अमेरिका का आरोप है कि मादुरो सरकार तेल से होने वाली कमाई का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में कर रही थी।
- चुनावों की वैधता पर सवाल
अमेरिका और वेनेजुएला के विपक्ष ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव को फर्जी बताया था। वॉशिंगटन का कहना है कि मादुरो अब लोकतांत्रिक रूप से चुने हुए राष्ट्रपति नहीं हैं।
वेनेजुएला की प्रतिक्रिया
वेनेजुएला सरकार ने अमेरिकी कार्रवाई को साम्राज्यवादी हमला और संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है। सरकार ने आरोप लगाया कि अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल और खनिज संसाधनों पर है। हमले के बाद देश में आपातकाल जैसी स्थिति घोषित कर दी गई है और राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाओं को सक्रिय कर दिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिकी कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और विरोध देखने को मिल रहा है।कई देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी देश के मौजूदा राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई के जरिए हिरासत में लेना वैश्विक राजनीति में बेहद खतरनाक मिसाल है।