अमेरिका की राह पर ड्रैगन… जानिए क्या है चीन की विस्तारवादी नीति जिसके कारण वो बार बार ताइवान पर ठोक रहा अपना दावा 

China stand on taiwan : चीन ने एक बार फिर ताइवान ( chaina – taiwan relatio ) को लेकर अपने रुख को दोहराते हुए साफ कर दिया है कि वह इसको अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और भविष्य में उसके साथ पुनर्मिलन को अपरिहार्य समझता है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग (Xu Feihong) ने ताइवान के मुद्दे पर दो टूक बयान देते हुए कहा है कि ताइवान ऐतिहासिक, कानूनी और राजनीतिक रूप से चीन का हिस्सा रहा है और रहेगा।

क्या है चीन ताइवान नया विवाद

भारत में चीनी राजदूत का यह बयान ऐसे समय आया है जब ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की सैन्य गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं और अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश ताइवान के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं। ऐसे में चीन की यह कड़ी प्रतिक्रिया वैश्विक राजनीति में नए तनाव के संकेत के रूप में देखी जा रही है।

चीन ताइवान को क्यों नहीं मानता स्वतंत्र देश

चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ताइवान को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ताइवान प्राचीन काल से चीन का हिस्सा रहा है। वह कभी स्वतंत्र राष्ट्र नहीं रहा और भविष्य में भी स्वतंत्र नहीं होगा। राजदूत ने यह भी दोहराया कि चीन की ‘वन चाइना पॉलिसी’ उसकी विदेश नीति की बुनियाद है और इस मुद्दे पर किसी तरह का समझौता संभव नहीं है।

शी जिनपिंग के दिमाग में क्या है?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहले भी कई बार ताइवान के साथ मातृभूमि के पुनर्मिलन को अपना ऐतिहासिक लक्ष्य बता चुके हैं। उनके नेतृत्व में चीन ने न सिर्फ कूटनीतिक बल्कि सैन्य स्तर पर भी ताइवान पर दबाव बढ़ाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग ताइवान मुद्दे को चीन की राष्ट्रीय पहचान और संप्रभुता से जोड़कर देख रहे हैं। यही कारण है कि बीजिंग अब इस मुद्दे पर पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक नजर आ रहा है।

बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ और वैश्विक चिंता

हाल के महीनों में ताइवान के आसपास चीनी वायुसेना और नौसेना की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ी हैं। चीन लगातार सैन्य अभ्यास कर रहा है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि वह भविष्य में किसी बड़े कदम की तैयारी कर सकता है। वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ताइवान की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। अमेरिका ताइवान को सैन्य और तकनीकी सहायता देता रहा है, जिसे चीन अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानता है।

भारत के लिए क्या मायने रखता है यह बयान?

भारत और चाइना के बीच हाल के वर्षों में भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी के बीच यह बयान नई कूटनीतिक बहस को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह संदेश सिर्फ ताइवान के लिए नहीं, बल्कि उन सभी देशों के लिए है जो ताइवान के मुद्दे पर बीजिंग के रुख से अलग सोच रखते हैं। हालांकि चीन ने सीधे तौर पर किसी सैन्य कार्रवाई की बात नहीं कही है, लेकिन जिस तरह से बयानबाजी और सैन्य गतिविधियाँ तेज हुई हैं, उससे यह सवाल जरूर उठ रहा है कि आने वाले समय में ताइवान को लेकर कोई बड़ा भू-राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

फिलहाल, दुनिया की नजरें बीजिंग और ताइपे दोनों पर टिकी हैं और यह देखना अहम होगा कि यह तनाव कूटनीति तक सीमित रहता है या किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ता है।

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