Nitish kumar Bihar Yatra : मकर संक्रांति के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी 16वीं यात्रा पर निकलने वाले हैं. विधानसभा चुनाव 2025 में बड़ी जीत के बाद यह उनकी पहली बड़ी जनसंपर्क यात्रा होगी, जिसमें वे सीधे जनता से मिलेंगे, विकास कार्यों की जमीनी हकीकत जानेंगे और खास तौर पर महिलाओं से संवाद कर सरकार की योजनाओं पर फीडबैक लेंगे. मुख्यमंत्री की यह यात्रा इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि हर बार जब-जब नीतीश कुमार यात्रा पर निकले हैं, लौटने के बाद शराबबंदी कानून में किसी न किसी तरह का बदलाव जरूर किया गया है. ऐसे में इस बार भी कयास लगाए जा रहे हैं कि शराबबंदी कानून में संशोधन हो सकता है, जिससे इसकी उपयोगिता बढ़े और लगातार हो रही आलोचना को कम किया जा सके.
क्यों खास है नीतीश कुमार 16वीं यात्रा
सूत्रों के मुताबिक, यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री जिले-जिले जाकर विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे. सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं की स्थिति पर अधिकारियों से रिपोर्ट लेंगे. इसके साथ ही आम लोगों, खासकर महिलाओं से संवाद कर यह जानने की कोशिश करेंगे कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें कितना मिल रहा है और किन स्तरों पर दिक्कतें आ रही हैं. महिला सशक्तिकरण नीतीश सरकार की प्राथमिकता रही है. शराबबंदी को भी महिला सुरक्षा और परिवारों की खुशहाली से जोड़कर देखा गया है. यही वजह है कि इस यात्रा में महिलाओं की राय सरकार के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.
चुनाव के दौरान उठा शराबबंदी की सफलता पर सवाल
विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान बिहार में शराबबंदी की सफलता पर सत्ताधारी और विपक्षी दोनों खेमों के नेताओं ने सवाल उठाए थे. जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने शराबबंदी को पूरी तरह फेल करार दिया था. NDA के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा था कि थोड़ी-थोड़ी पीना कोई गुनाह नहीं है. RJD नेता कुमार सर्वजीत ने विधानसभा में शराबबंदी हटाने की मांग की थी. पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व भाजपा नेता आर.के. सिंह ने भी बिहार में शराबबंदी को असफल बताया था. इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि सरकार शराबबंदी कानून में बड़े बदलाव कर सकती है.
यात्रा के बाद बदलेगा कानून?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार की यात्राएं सिर्फ जनसंपर्क तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे इससे सरकार की नीतियों की दिशा भी तय करते हैं. पिछली यात्राओं के अनुभवों के आधार पर कई बार शराबबंदी कानून में संशोधन किए गए हैं. इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री लोगों की राय जानने के बाद कानून में ऐसे बदलाव कर सकते हैं, जिससे एक ओर शराब के अवैध कारोबार पर लगाम लगे और दूसरी ओर आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिले.
शराबबंदी कानून में अब तक हुए बड़े बदलाव
साल 2016: बिहार मद्यनिषेध व उत्पाद कानून-2016
- शराब पीने पर 3 साल जेल की सजा.
- सभी अपराध गैर-जमानती.
- किसी घर में शराब मिलने पर 18 साल से ऊपर के सभी सदस्यों को सजा.
- उत्पाद विभाग के एएसआई को पुलिसिंग का अधिकार.
- विशेष न्यायालय के गठन का प्रावधान.
साल 2017: बिहार उत्पाद (संशोधन) विधेयक-2016
- प्रताड़ित करने वाले पुलिस व उत्पाद अफसरों के लिए 3 महीने की सजा का प्रावधान.
- शराब से जुड़े अपराध जमानती किए गए.
- घर में शराब मिलने पर सभी सदस्यों पर कार्रवाई का प्रावधान हटाया गया.
- उत्पाद विभाग के एएसआई से पुलिसिंग का अधिकार छीना गया.
- स्पेशल कोर्ट का प्रावधान समाप्त किया गया.
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साल 2018: पहली बार शराब पीते पकड़े गए तो 50 हजार जुर्माना
- पहली बार पकड़े जाने पर 50 हजार रुपए जुर्माना या 3 महीने जेल.
- दूसरी बार पकड़े जाने पर 5 साल की सजा और 5 लाख रुपए तक जुर्माना.
- जहरीली शराब से मौत होने पर सप्लायर के लिए सजा-ए-मौत का प्रावधान.
- सिर्फ शराब पीने वाला ही आरोपी होगा, पूरे परिवार को सजा नहीं.
- होटल या प्रतिष्ठान में शराब मिलने पर सिर्फ उसी कमरे को सील किया जाएगा.
- मकान मालिक की जानकारी के बिना शराब रखने पर केवल किराएदार पर कार्रवाई.
साल 2022: बिहार मद्य निषेध और उत्पाद संशोधन विधेयक-2022
- नशे की हालत में पकड़े जाने पर तुरंत गिरफ्तारी.
- नजदीकी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेशी.
- सरकार द्वारा तय जुर्माना जमा करने पर तुरंत रिहाई.
- जुर्माना न देने पर एक महीने की जेल.
- जुर्माना लेकर छोड़ने का अधिकार मजिस्ट्रेट को.
साल 2023: गाड़ी जब्ती और मुआवजे से जुड़ा संशोधन
- शराब मामले में जब्त गाड़ी को छुड़वाने की सुविधा.
- गाड़ी की कीमत का 10% जमा करने पर रिहाई.
- अधिकारी कोर्ट की अनुमति से 5 लाख रुपए जुर्माना लेकर गाड़ी छोड़ सकते हैं.
- पहले 50% राशि जमा करनी पड़ती थी.
- जहरीली शराब से मौत पर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपए मुआवजा.
क्या बदलेगी शराबबंदी की दिशा?
अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री की 16वीं यात्रा पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि जनता की राय, जमीनी अनुभव और राजनीतिक दबाव को देखते हुए नीतीश कुमार शराबबंदी कानून में एक बार फिर बड़ा संशोधन कर सकते हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि यात्रा के बाद बिहार की शराब नीति किस दिशा में जाती है, सख्ती और बढ़ेगी या कानून को और व्यावहारिक बनाने की कोशिश होगी.