सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा से लेकर दूसरी बड़ी जरूरत तक…गिग वर्कर्स के लिए क्या है बिहार में कानून ?

gig worker laws : बिहार विधानसभा ने 23 जुलाई को बिहार प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स (निबंधन, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) विधेयक, 2025 को मंजूरी दी थी. बिहार में यह विधेयक देश में ऐसे समय में कानून बनकर लागू हुआ, जब प्लेटफॉर्म-आधारित श्रमिक (जैसे डिलीवरी कर्मी, ड्राइवर, कोरियर वर्कर्स) लंबे समय से सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे थे. इसके प्रमुख प्रावधानों में 16 वर्ष से अधिक आयु के गिग वर्कर्स का आधार कार्ड के माध्यम से अनिवार्य पंजीकरण और डिजिटल या भौतिक पहचान पत्र जारी करना तथा भविष्य निधि, बीमा, मातृत्व लाभ, दुर्घटना बीमा और वृद्धावस्था सुरक्षा सहित सामाजिक सुरक्षा लाभों का प्रावधान जोड़ा है. अन्य प्रावधानों में कल्याण कोष और शिकायत निवारण समिति की स्थापना, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और डेटा संरक्षण शामिल हैं.

कानून की मांग के लिए सड़कों पर आंदोलन

पिछले साल जनवरी 2024 और जनवरी 2025 में गिग वर्कर्स और उनके यूनियनों द्वारा आयोजित बड़े संघर्ष, सड़क पर प्रदर्शन और रास्‍ता रोको जैसे अभियान इस बिल को कानून बनाने में निर्णायक भूमिका निभा चुके हैं. इन आंदोलनों ने सरकार पर दबाव बनाया कि गिग वर्कर्स को औपचारिक पहचान, सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए. राज्य सरकार ने यह कानून पारित करते हुए कहा कि गिग वर्कर्स राज्य की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं, पर उनका कार्य असंगठित, असुरक्षित और किसी कानूनी दायरे में नहीं आता था. इससे अब उन्हें वैधानिक सुरक्षा और कल्याण सुविधाएँ और एक पहचान मिलेगी.

कानून के मुख्य प्रावधान

  • पंजीकरण और पहचान

सभी प्लेटफॉर्म और एग्रीगेटर (जैसे ज़ोमैटो, स्विगी, ओला, उबर जैसे ऐप आधारित सेवाएँ) को 60 दिनों के भीतर गिग वर्कर्स का डेटाबेस पंजीकृत करना अनिवार्य होगा. हर गिग वर्कर को एक विशिष्ट पहचान संख्या (Unique ID) और पहचान कार्ड मिलेगा, जिससे वह कल्याण योजनाओं का लाभ ले सकेगा.

  • सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय सुरक्षा

कानून के तहत सरकार निम्नलिखित सामाजिक सुरक्षा लाभ और मुआवज़ा प्रदान करेगी. जिसके तहत आकस्मिक मौत पर ₹4 लाख का सहायता और प्राकृतिक कारणों से मौत पर ₹2 लाख का सहायता राशि दी जाएगी. वहीं अस्थाई/स्थायी विकलांगता पर ₹74,000 से ₹2.5 लाख तक की सहायता एवं अस्पताल में भर्ती होने पर ₹5,400 (एक सप्ताह तक) और ₹16,000 (एक सप्ताह से अधिक) की सहायता राशि प्रदान करना होगा. वहीं प्रेग्नेंसी के दौरान महिला गिग वर्कर्स को 90 दिनों तक मातृत्व लाभ मिलेगा.

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  • कल्याण बोर्ड और शिकायत निवारण

कानून के तहत एक गिग वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन होगा. यह बोर्ड पंजीकरण, डेटा प्रबंधन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन और श्रमिकों की शिकायतों का निवारण करेगा. इसके अध्यक्ष राज्य के श्रम संसाधन मंत्री होंगे.

  • न्यूनतम वेतन और पारदर्शिता

प्लेटफॉर्म कंपनियों के साथ वर्कर्स के अनुबंध पारदर्शी और आसान भाषा में होंगे, तथा प्लेटफॉर्म वर्क के मानदंड, रेटिंग पद्धति और कार्य आवंटन के तरीके स्पष्ट रूप से श्रमिक को बताए जाएँगे.

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