बिहार में महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल…2025 में 2025 लड़कियों से दुष्कर्म, STF की कार्रवाई बढ़ी लेकिन चिंता बरकरार

Bihar Women crime : बिहार में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अपराध एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है. बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 में अब तक 2025 लड़कियों और महिलाओं से दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए हैं. हालांकि 2024 की तुलना में कुछ अपराधों में मामूली कमी आई है, लेकिन हर एक घटना राज्य की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है.

क्या कहते हैं अपराध के आंकड़े ?

बिहार पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार महिलाओं से जुड़े प्रमुख अपराधों में यह बदलाव देखने को मिला है.

  • अपराध- साल 2024 -साल 2025
  • दुष्कर्म- 2205 -2025
  • हत्या -2786- 2556
  • डकैती -3186- 2502
  • लूट- 1975 -1558
  • अपहरण -238 -174

आंकड़े बताते हैं कि 2025 में दुष्कर्म के मामलों में संख्यात्मक गिरावट जरूर आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एक भी महिला के साथ अपराध स्वीकार्य नहीं होना चाहिए इसलिए हर घटना सिस्टम की विफलता को दर्शाती है. हालांकि आंकड़े यह भी कहते है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध पर लगाम लगाने के लिए बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 2024-25 में कार्रवाई तेज की है. STF की कार्रवाई में 2025 में मुठभेड़ों और गिरफ्तारियों की संख्या में बड़ा उछाल देखने को मिला है, जिसे पुलिस प्रशासन कानून-व्यवस्था सुधार की दिशा में अहम कदम बता रहा है.

किन मामलों को शामिल किया गया है?

बिहार पुलिस के अनुसार 2025 के आंकड़ों में फ्रेंडशिप, प्रेम संबंध या लिव-इन विवाद के चलते दर्ज दुष्कर्म के मामले भी शामिल हैं. दर्ज मामलों में नाबालिग और बालिकाओं से जुड़े केस भी बड़ी संख्या में हैं. महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आंकड़ों में गिरावट दिखाकर सरकार संतुष्ट नहीं हो सकती. ज़रूरत है तेज़ सुनवाई, सख्त सज़ा और जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की. वहीं विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर महिला सुरक्षा में विफलता का आरोप लगा रहा है. भले ही 2024 की तुलना में 2025 में कुछ अपराधों में कमी दर्ज हुई हो, लेकिन 2025 लड़कियों से दुष्कर्म का आंकड़ा अपने आप में भयावह है. यह साफ संकेत देता है कि कानून का डर अभी भी अपराधियों के मन में पूरी तरह नहीं बैठ पाया है. महिला सुरक्षा को लेकर अब सिर्फ आंकड़ों की नहीं, ठोस कार्रवाई, त्वरित न्याय और सामाजिक बदलाव की ज़रूरत है.

सोर्स : मीडिया रिपोर्ट

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