Bihar Tableau at Republic Day : गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर जब भारत अपने 77 वें गणतंत्र का उत्सव मना रहा था. पूरे दुनिया की तरह बिहार की नजरें भी कर्तव्य पथ पर अपने देश की सौर्य गाथा निहार रही थी. लेकिन उसकी अपनी आखें ढूंढ रही थी कर्तव्य पथ के उस कोने को जहां उसकी अपनी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक पहचान की कोई एक झलक दिख जाए. लेकिन इस बार फिर उस निरासा हाथ लगी.
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो साल 2026 में मखाना (फॉक्स नट्स) की थीम पर आधारित झांकी के साथ बिहार ने लगातार दूसरे वर्ष राष्ट्रीय परेड में हिस्सा लेने वाली थी लेकिन सरकार के नई रोटेशन नीति के कारण बिहार कर्तव्य पथ तक नही पहुंच सका. दरअसल, रक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नई रोटेशन नीति लागू की है. इस नीति के तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को तीन साल के भीतर कम से कम एक बार झांकी दिखाने का मौका दिया जाएगा. 2005 से 2026 के बीच कुल 8 बार बिहार की झांकी गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हो चुकी है।
8 साल बाद हुई थी वापसी
2025 में करीब नौ साल बाद बिहार की झांकी गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुई थी. जिसके बाद गणतंत्र दिवस पर इस बार कर्तव्य पथ पर बिहार की झांकी नजर नहीं आयी. गौरतलब है कि 2017 से 2024 तक लगातार आठ वर्षों तक बिहार की झांकी को केंद्रीय चयन समिति से मंजूरी नहीं मिल पाई थी। इस दौरान छठ महापर्व, शराबबंदी, जल-जीवन-हरियाली मिशन जैसे विषयों पर आधारित प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन हर बार उन्हें अस्वीकृति का सामना करना पड़ा. लंबे अंतराल के बाद 2025 में बिहार की वापसी हुई। 2025 में बिहार की झांकी का विषय प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर और उसका आधुनिक पुनर्जीवन रहा। यह झांकी न सिर्फ बिहार की ऐतिहासिक शैक्षणिक विरासत को दर्शाती थी, बल्कि ज्ञान परंपरा की निरंतरता का संदेश भी देती थी। यही झांकी आठ साल के अंतराल के बाद बिहार की राष्ट्रीय मंच पर वापसी का प्रतीक बनी।
कर्तव्य पथ पर कब-कब दिखी बिहार की झांकी
- 2025: नालंदा की विरासत और आधुनिक पुनरुत्थान
- 2016: चंपारण सत्याग्रह (महात्मा गांधी के आंदोलन की शताब्दी को समर्पित)
- 2013: मिथिला की पारंपरिक लोककला सिक्की आर्ट
- 2012: सामाजिक परंपरा धरहरा की बेटी
- 2011: अंग क्षेत्र की पारंपरिक मंजूषा कला
- 2010: विश्वविख्यात मिथिला पेंटिंग (मधुबनी कला)
- 2005: नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर (आधुनिक दौर में दर्ज पहली भागीदारी)
सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊर्जा
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 2005 से 2026 के बीच कुल 8 बार बिहार की झांकी से यह संकेत मिला है कि बिहार की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर प्रमुखता मिली। नालंदा जैसे विषयों ने यह भी साबित किया कि बिहार सिर्फ अपनी विरासत ही नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं के साथ भी आगे बढ़ रहा है। लेकिन 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ से बिहार की झांकी की दूरी सवाल खड़े कर रही है. बिहार के लोग राज्य और केंद्र सरकार से सवाल कारण पूछ रहे हैं.