Pappu Yadav Arrested : पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की जमानत याचिका पर आज सुनवाई होनी है. पटना पुलिस द्वारा 6 फरवरी की आधी रात 31 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तारी के बाद फिलहाल वे पटना के बेऊर जेल में बंद हैं. 7 फरवरी को पुलिस ने उन्हें पटना सिविल कोर्ट में पेश किया, जहां अदालत ने दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था.
उनकी गिरफ्तारी को लेकर उनके समर्थकों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. सोशल मीडिया में भी पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर अलग अलग दावे किए जा रहे और कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया जा रहा. दरअसल,यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब पप्पू यादव पटना में एक NEET छात्रा के कथित रेप और हत्या मामले को लेकर पुलिस प्रशासन पर लगातार हमलावर थे. उनकी गिरफ्तारी को लेकर दैनिक भाष्कर के एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी राजनीति, पर्सनल खुन्नस और प्लानिंग तीनों का मिश्रित परिणाम है.
1995 का जमीन विवाद मामला बना गिरफ्तारी का आधार
पुलिस के अनुसार यह गिरफ्तारी 1995 के एक जमीन से जुड़े मामले में की गई है. इस केस में अदालत में लगातार गैरहाजिर रहने के कारण उनकी जमानत रद्द कर दी गई थी और कुर्की का आदेश जारी किया गया था. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पुलिस ने पुराने लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान इस फाइल को दोबारा सक्रिय किया. जैसे ही सांसद दिल्ली से बजट सत्र खत्म कर पटना लौटे, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया.
NEET छात्रा केस में मुखर थे पप्पू यादव
पिछले कुछ दिनों से पप्पू यादव पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा के कथित रेप और हत्या के मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे थे. वह लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए पटना पुलिस पर निष्पक्ष जांच न करने का आरोप लगा रहे थे. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया कि NEET छात्रा मामले में उनके आरोप के चलते बढ़ते राजनीतिक दबाव और बयानबाजी से विभाग असहज था. हालांकि आधिकारिक तौर पर पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी पूरी तरह अदालत के आदेश के पालन में की गई है.
सूत्रों का दावा है कि SIT की बैठकों के दौरान यह चर्चा हुई थी कि मामले को राजनीतिक रंग दिए जाने से जांच प्रभावित हो रही है. बताया जाता है कि कुछ अधिकारियों ने पप्पू यादव के करीबी लोगों के माध्यम से उन्हें संयम बरतने का संदेश भी दिया था. लेकिन इसके बाद भी पप्पू यादव ने अपनी बयानबाजी जारी रखी. इसके बाद विभाग के भीतर पुराने मामलों को सक्रिय कर गिरफ्तारी लिया गया और इसे बेहद गोपनीय रखा गया.
SSP से पुरानी खींचतान की चर्चा
कई मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पुलिस विभाग के भीतर चर्चा है कि पप्पू यादव और पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा के बीच पुराना मतभेद है. इसके पीछे के कारण को लेकर बताया जाता है कि पूर्णिया में तैनाती के दौरान कार्तिकेय शर्मा ने पप्पू यादव की वीवीआईपी सुरक्षा से जुड़ी एक योजना को निरस्त किया था, जिसके बाद दोनों के बीच संबंधों में खटास आई. हालांकि इन दावों पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. सूत्रों के अनुसार, यदि मौजूदा केस में उन्हें जल्द जमानत मिलती है, तो 2017 में कोतवाली थाने में दर्ज एक प्रदर्शन से जुड़े मामले को भी सक्रिय किया जा सकता है. पुलिस विभाग का कहना है कि सभी लंबित मामलों की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार समीक्षा की जा रही है.
राजनीतिक हलकों में हलचल
गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. समर्थकों ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि पुलिस का कहना है कि यह अदालत के आदेश का सख्ती से अनुपालन है. अब सबकी नजर अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि पप्पू यादव को राहत मिलती है या न्यायिक हिरासत आगे बढ़ती है.