Om Birla news : संसद के निचले संदन लोकसभा में उस समय सियासी हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा। इस प्रस्ताव को 118 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के संचालन में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्ष की आवाज़ को पर्याप्त अवसर नहीं दिया। यह घटनाक्रम संसद के मौजूदा सत्र के बीच सामने आया है और इससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह प्रस्ताव सदन में चर्चा और मतदान तक पहुंचेगा, और यदि पहुंचता है तो क्या यह पारित हो पाएगा?
क्या है लोकसभा स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया
लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 तथा लोकसभा के कार्यसंचालन नियमों (विशेषकर नियम 200) के तहत निर्धारित है। प्रक्रिया इस प्रकार है…
- कोई भी सांसद स्पीकर या उप-स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा महासचिव को लिखित नोटिस देता है।
- प्रस्ताव में आरोप स्पष्ट, सटीक और मर्यादित भाषा में होने चाहिए, इसमें तर्क-वितर्क, अनुमान, व्यंग्य या अपमानजनक टिप्पणियां शामिल नहीं की जा सकतीं।
- नोटिस मिलने के बाद इसे कार्यसूची में शामिल किया जाता है।
- प्रस्ताव पर चर्चा की तिथि नोटिस मिलने के कम से कम 14 दिन बाद तय की जाती है।
- प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन आवश्यक है।
- प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान सामान्यत 10 दिनों के भीतर कराया जाता है।
- जब प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब स्पीकर स्वयं अध्यक्षता नहीं कर सकते, उस स्थिति में उप-स्पीकर या अन्य नामित सदस्य सदन की कार्यवाही संचालित करते हैं।
- प्रस्ताव पारित होने के लिए सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत का समर्थन जरूरी होता है।
- इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
लोकसभा के इतिहास में अब तक स्पीकर के खिलाफ तीन प्रमुख अविश्वास प्रस्ताव औपचारिक रूप से लाए जा चुके हैं, हालांकि इनमें से कोई भी सफल नहीं हुआ।
1. जीवी मावलंकर (1954)
18 दिसंबर 1954 को स्वतंत्र भारत के पहले लोकसभा स्पीकर G. V. Mavalankar के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। बहस के बाद सदन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
2. हुकम सिंह (1966)
24 नवंबर 1966 को तत्कालीन स्पीकर Hukam Singh के विरुद्ध प्रस्ताव पेश किया गया। हालांकि इसे आवश्यक 50 सदस्यों का समर्थन नहीं मिल सका और यह प्रारंभिक चरण में ही गिर गया।
3. बलराम जाखड़ (1987)
15 अप्रैल 1987 को स्पीकर Balram Jakhar के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया। विस्तृत बहस के बाद सदन ने इसे अस्वीकार कर दिया।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न समय पर कुछ अन्य स्पीकर्स के खिलाफ नोटिस या चर्चा की खबरें सामने आईं, लेकिन वे औपचारिक प्रस्ताव के रूप में आगे नहीं बढ़ सके। इनमें शामिल हैं:
- Neelam Sanjiva Reddy (1967)
- G. M. C. Balayogi (2001)
- Meira Kumar (2011)
- स्वयं Om Birla के खिलाफ 2020 में भी नोटिस की चर्चाएं हुई थीं.
क्या मौजूदा प्रस्ताव पारित हो पाएगा?
वर्तमान लोकसभा की राजनीतिक संरचना को देखते हुए, विपक्ष द्वारा 118 सांसदों का समर्थन जुटाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि प्रस्ताव पारित कराने के लिए सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सत्तापक्ष एकजुट रहता है, तो प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम है। फिर भी, इस प्रस्ताव के जरिए विपक्ष सदन की कार्यप्रणाली और स्पीकर की भूमिका को लेकर व्यापक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहा है। भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक कोई भी लोकसभा स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से नहीं हटाया गया है। ऐसे प्रस्ताव अधिकतर राजनीतिक असहमति दर्ज कराने और सदन के संचालन को लेकर गंभीर आपत्तियां उठाने का माध्यम बने हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सदन में यह प्रस्ताव किस रूप में आगे बढ़ता है और क्या यह भारतीय संसदीय इतिहास में कोई नया अध्याय जोड़ेगा।