Bihar politics : बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी द्वारा मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग किए जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भड़क गए और सदन में तीखी प्रतिक्रिया दी. उनके बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है.
कानून-व्यवस्था पर विपक्ष का हमला
सोमवार को परिषद की कार्यवाही के दौरान आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह ने दरभंगा में छह वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म के बाद हत्या का मामला उठाया. इस पर राबड़ी देवी ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की. राबड़ी देवी ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार स्थिति संभालने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए.
मुख्यमंत्री की तीखी प्रतिक्रिया
विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार में दोषियों पर त्वरित कार्रवाई होती है और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए गए हैं. इस दौरान उन्होंने राबड़ी देवी की ओर इशारा करते हुए कहा कि इन लोगों ने पहले क्या काम किया है? आज तक किसी महिला को आगे बढ़ाया है? उन्होंने यह भी कहा कि जब लालू यादव पद से हटे थे, तब कुछ ही दिनों बाद राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया गया था. मुख्यमंत्री के इस बयान में लड़की शब्द के प्रयोग को लेकर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई. आरजेडी ने इसे अमर्यादित और महिलाओं का अपमान बताया.
Tejashwi Yadav को बच्चा कहने पर भी विवाद
इससे पांच दिन पहले बिहार विधानसभा में भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला था. बजट सत्र के दौरान जब मुख्यमंत्री अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे, तभी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उन्हें टोका. इस पर मुख्यमंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अरे पहले सुनो… तुम बच्चा हो, बैठो-बैठो… हल्ला मत करो. उन्होंने आगे कहा कि मैं तुम्हारे पिता के समय का हूं, मैंने तुम्हें बनाया है. नीतीश कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव ने विधायकों को तोड़ने के लिए पैसे खर्च करने की कोशिश की थी. हालांकि इन आरोपों पर तेजस्वी यादव ने मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी और संयम बनाए रखा.
विपक्ष का पलटवार
राबड़ी देवी को लड़की कहे जाने पर आरजेडी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. पार्टी ने इसे संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताते हुए मुख्यमंत्री से माफी की मांग की. तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान महिलाओं के प्रति संकीर्ण सोच को दर्शाता है. उन्होंने यह भी कहा कि जब तर्क और तथ्य कम पड़ जाते हैं तो भाषा की मर्यादा लांघी जाती है. लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कई बार सार्वजनिक मंचों पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर चुके हैं.
पुराने राजनीतिक रिश्तों की पृष्ठभूमि
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव के बीच दशकों पुराना राजनीतिक रिश्ता रहा है. दोनों नेताओं ने साथ मिलकर राजनीति की शुरुआत की थी. 1990 से 2005 तक राज्य की राजनीति में लालू परिवार का प्रभाव रहा, जबकि 2005 के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन हुआ. 2015 और 2022 में महागठबंधन की सरकार बनी, जिसमें तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने. हालांकि बाद में राजनीतिक समीकरण बदले और नीतीश कुमार ने फिर से भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया. विश्लेषकों के अनुसार, दोनों परिवारों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और पुराने समीकरणों का असर आज भी सदन की बहसों में दिखता है, जिससे व्यक्तिगत टिप्पणियां भी सामने आ जाती हैं.
संसदीय भाषा और मर्यादा पर बहस
ताजा घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में संसदीय भाषा और मर्यादा को लेकर बहस तेज हो गई है. विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री को अपने शब्दों का चयन सावधानी से करना चाहिए, जबकि सत्तापक्ष का दावा है कि विपक्ष अनावश्यक रूप से मुद्दे को तूल दे रहा है. फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है, लेकिन आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना जताई जा रही है.