थिएटर और ओटीटी ही नहीं और भी तरीके है फिल्मों के कमाई के…जानें कैसे होता है फायदा

OTT vs Theatre: फिल्मों में कमाई कैसे होती है. ज्यादातर लोग मानते हैं कि थिएटर और ओटीटी दोनों से ही फिल्मों को कमाई होता है. हालांकि ये भी सच है कि थिएटर रिलीज में टिकट बिक्री जबकि ओटीटी पर डिजिटल राइट्स बेचकर पैसा कमाया जाता है. लेकिन कोविड-19 के बाद भारतीय सिनेमा के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. जहां पहले फिल्म की सफलता का पैमाना सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन होता था, वहीं अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने कमाई के समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है. हालांकि इसके अलावा भी कई तरीके हैं.

थिएटर रिलीज…बॉक्स ऑफिस पर दांव

फिल्म जब सिनेमाघरों में रिलीज होती है तो उसकी कमाई मुख्य रूप से टिकट बिक्री पर निर्भर करती है. पहले दिन की ओपनिंग, वीकेंड कलेक्शन और दर्शकों की प्रतिक्रिया (वर्ड ऑफ माउथ) फिल्म की दिशा तय करते हैं. टिकट बिक्री से होने वाली कमाई का बंटवारा निर्माता, डिस्ट्रीब्यूटर और थिएटर मालिकों के बीच होता है. आमतौर पर शुरुआती हफ्तों में निर्माता का हिस्सा ज्यादा रहता है, जो बाद में घटता जाता है.

अगर कोई फिल्म 100 से 300 करोड़ रुपये के क्लब में पहुंच जाती है, तो निर्माता को भारी मुनाफा हो सकता है. हालांकि, फिल्म के फ्लॉप होने पर नुकसान भी उतना ही बड़ा होता है. इसके साथ सिनेमाघरों में पॉपकॉर्न, कोल्ड ड्रिंक और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री से भी अच्छी कमाई होती है, जिसका बड़ा हिस्सा थिएटर मालिकों के पास जाता है. इसके अलावा विदेशी बाजारों में रिलीज से ओवरसीज कलेक्शन भी जुड़ता है, जो कुल कमाई को बढ़ाता है.

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स…तय रकम से कम जोखिम

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर फिल्मों की कमाई का तरीका अलग है. यहां टिकट बिक्री नहीं होती, बल्कि निर्माता डिजिटल राइट्स बेचते हैं. इसके बदले उन्हें पहले से तय रकम मिलती है, जिससे जोखिम काफी कम हो जाता है. कई बार थिएटर में औसत प्रदर्शन करने वाली फिल्में भी ओटीटी डील के जरिए अपना बजट निकाल लेती हैं. बड़ी फिल्मों के डिजिटल राइट्स 40 से 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक में बिकने की खबरें आती रही हैं. ओटीटी मॉडल में कमाई तय होती है, जबकि थिएटर मॉडल में कमाई दर्शकों की संख्या पर निर्भर करती है.

कौन करता है ज्यादा कमाई?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित होती है तो थिएटर रिलीज से ज्यादा मुनाफा होता है. वहीं, ओटीटी मॉडल सुरक्षित और सुनिश्चित कमाई का विकल्प देता है. इसी वजह से आजकल अधिकतर निर्माता पहले थिएटर रिलीज, फिर कुछ हफ्तों बाद ओटीटी प्रीमियर के जरिए हाइब्रिड रणनीति अपना रहे हैं. इससे दोनों प्लेटफॉर्म्स से कमाई का अवसर मिलता है.

कमाई के अन्य स्रोत भी अहम

फिल्म की कुल कमाई सिर्फ टिकट या डिजिटल राइट्स तक सीमित नहीं होती. सैटेलाइट राइट्स, म्यूजिक राइट्स, ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूशन, ब्रांड टाई-अप और प्रमोशन डील्स भी अहम भूमिका निभाते हैं. साफ है कि कोविड-19 के बाद फिल्म इंडस्ट्री का बिजनेस मॉडल बहुआयामी हो चुका है. अब किसी भी फिल्म की असली सफलता का आकलन करने के लिए थिएटर और ओटीटी दोनों के आंकड़ों को साथ देखना जरूरी हो गया है.

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