भारत में सर्विस चार्ज पर सख्ती…रेस्टोरेंट अब जबरन नहीं जोड़ सकेंगे शुल्क, जानें क्या है कानून

Service Charge Rule : भारत में रेस्टोरेंट द्वारा बिल में अनिवार्य (Mandatory) सर्विस चार्ज जोड़ने पर अब स्पष्ट रोक है. उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने साफ किया है कि सर्विस चार्ज पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) है और इसे देना या न देना ग्राहक के विवेक पर निर्भर करेगा.

उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन

प्राधिकरण ने अपने दिशानिर्देशों में कहा है कि बिल में ऑटोमैटिक रूप से सर्विस चार्ज जोड़ना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है. यदि कोई रेस्टोरेंट इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. साथ ही, ग्राहक को रिफंड देने और आगे की कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है. इस मुद्दे पर Delhi High Court ने भी पहले CCPA के दिशा-निर्देशों को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया था कि सर्विस चार्ज को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता.

क्या है नियम?

सर्विस चार्ज को बिल में डिफ़ॉल्ट रूप से नहीं जोड़ा जा सकता है. अगर किसी रेस्टोरेंट ने जबरन जोड़ दिया तो ग्राहक के मना करने पर इसे तुरंत हटाना होगा. सर्विस चार्ज को GST के साथ जोड़कर अनिवार्य शुल्क की तरह पेश नहीं किया जा सकता. इसके साथ सेवा से असंतुष्ट होने पर ग्राहक संबंधित मंच पर शिकायत दर्ज करा सकता है. गौरतलब है कि GST सरकार को जाता है, जबकि सर्विस चार्ज रेस्टोरेंट द्वारा लगाया जाने वाला शुल्क है. अब यह पूरी तरह ग्राहक की मर्जी पर निर्भर करेगा कि वह इसे देना चाहता है या नहीं.

उपभोक्ता संगठनों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे ग्राहकों को अधिक पारदर्शिता और अधिकार मिलेगा. वहीं, रेस्टोरेंट उद्योग को भी स्पष्ट संदेश दिया गया है कि उपभोक्ता अधिकारों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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