पब्लिक प्लेस पर किस करना, गले लगना या हाथ पकड़ना, प्यार का इज़हार…जानें क्या कहता है भारतीय कानून?

Legal rights of couples in India : पश्चिमी देशों का कई चलन भारत के बड़े शहरों में अब समान्य हो गया है. हालांकि पब्लिक प्लेस पर किस करना, गले लगना या हाथ पकड़ना अभी भी एक दुविधा भरा होता है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या भारत में सार्वजनिक स्थान पर किस करना, गले लगना या हाथ पकड़ना कानूनन अपराध है? सामाजिक बहस और तथाकथित मोरल पुलिसिंग की घटनाओं के बीच यह मुद्दा बार-बार चर्चा में आता है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय को समझने के लिए भारतीय दंड संहिता और हाल ही में लागू नए आपराधिक कानूनों को देखना जरूरी है.

क्या सार्वजनिक रूप से किस या गले लगना अपराध है?

कानूनी रूप से देखें तो भारत में ऐसा कोई स्पष्ट कानून नहीं है जो सीधे तौर पर सार्वजनिक स्थान पर हाथ पकड़ने, गले मिलने या किस करने को प्रतिबंधित करता हो. हालांकि, पुलिस अक्सर इस तरह के मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 294 का हवाला देती है. यह धारा सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य करने और उससे किसी को कष्ट या असुविधा होने की स्थिति में दंड का प्रावधान करती है.

स्पष्ट नहीं है अश्लीलता की परिभाषा

धारा 294 में अश्लील कृत्य की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है. यही कारण है कि कई बार पुलिस या स्थानीय प्रशासन परिस्थितियों के आधार पर सार्वजनिक स्नेह प्रदर्शन (PDA) को अश्लील मान लेता है. हाल ही में लागू हुए भारतीय न्याय संहिता में भी अश्लील कृत्य से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, लेकिन वहां भी व्याख्या का दायरा काफी हद तक परिस्थिति पर निर्भर करता है. कानूनी जानकारों का कहना है कि केवल हाथ पकड़ना या सामान्य रूप से गले लगना आमतौर पर अश्लीलता की श्रेणी में नहीं आता, जब तक कि उसमें कोई स्पष्ट रूप से आपत्तिजनक या अभद्र व्यवहार शामिल न हो.

अदालतों का क्या रुख रहा है?

भारतीय अदालतों ने समय-समय पर इस विषय पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं. केरल में 2014 में हुए किस ऑफ लव प्रोटेस्ट के दौरान सार्वजनिक स्नेह प्रदर्शन के समर्थन में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसी तरह अभिनेता शिल्पा शेट्टी और हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेयर से जुड़ा मामला भी चर्चा में रहा, जिसमें अदालत ने बाद में राहत दी थी. कई फैसलों में न्यायालयों ने माना है कि सहमति से किया गया सामान्य स्नेह प्रदर्शन स्वतः अश्लील नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि अश्लीलता का आकलन समाज के बदलते मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए.

कानून से ज्यादा सामाजिक सोच की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी प्रावधानों से अधिक असर सामाजिक मानसिकता का पड़ता है. कई बार तथाकथित ‘मोरल पुलिसिंग’ के कारण जोड़े सार्वजनिक स्थानों पर अपमान या उत्पीड़न का सामना करते हैं, भले ही उनका आचरण कानूनी रूप से अपराध न हो. कुल मिलाकर भारत में सार्वजनिक स्थान पर हाथ पकड़ना, गले लगना या हल्का किस करना सीधे तौर पर गैरकानूनी नहीं है. लेकिन यदि किसी कृत्य को अश्लील माना जाए और उससे लोगों को आपत्ति हो, तो पुलिस कार्रवाई संभव है. अंतिम निर्णय परिस्थितियों, स्थान और व्यवहार की प्रकृति पर निर्भर करता है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नागरिकों को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए, साथ ही सार्वजनिक मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना चाहिए.

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