बिहार के पांचवी सीट पर उलझा सियासी गणित…AIMIM और महागठबंधन के बीच बनी बात तो तेजस्वी का होगा फायदा

Tejashwi yadav : बिहार में राज्यसभा की चार सीटों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. राजनीतिक समीकरणों के अनुसार दो सीटें जनता दल (यूनाइटेड) (जेडीयू) और दो सीटें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खाते में जाती दिख रही हैं. हालांकि एक सीट को लेकर अब भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. इसी सीट पर महागठबंधन अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश में जुटा है.

41 विधायकों का गणित

राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है. महागठबंधन के सामने चुनौती यही है कि क्या वह यह आंकड़ा पार कर पाएगा या नहीं. इसी संदर्भ में आईपी गुप्ता की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हाल ही में आईपी गुप्ता हैदराबाद गए थे, जहां उनकी मुलाकात असदुद्दीन ओवैसी से हुई. इस मुलाकात के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या महागठबंधन, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है. मीडिया के अनुसार महागठबंधन की ओर से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि यदि समीकरण अनुकूल बनता है तो क्या AIMIM के पांच विधायक महागठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर सकते हैं.

AIMIM का अलग रुख

हालांकि AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता अख्तरुल ईमान ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी महागठबंधन को समर्थन देने के मूड में नहीं है. उन्होंने कहा कि AIMIM स्वयं अपना उम्मीदवार राज्यसभा के लिए उतार सकती है. अख्तरुल ईमान ने बयान दिया कि पार्टी लगातार सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है और अब समय आ गया है कि AIMIM को भी राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिले. उन्होंने अन्य दलों से समर्थन मांगते हुए कहा कि यदि कोई दल सच में सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ है, तो उसे AIMIM के उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए.

क्या AIMIM उतारेगी अपना उम्मीदवार?

AIMIM के पास वर्तमान में पांच विधायक हैं. यदि पार्टी अपना उम्मीदवार उतारती है, तो उसे जीत के लिए 36 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना होगा, जो राजनीतिक रूप से कठिन माना जा रहा है. हालांकि राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि समीकरण बदलने की स्थिति में दल-बदल या क्रॉस-वोटिंग की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता. गौरतलब है कि पूर्व में AIMIM के चार विधायक टूटकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में शामिल हो चुके हैं. ऐसे में फिर से किसी तरह की टूट-फूट की अटकलें भी लगाई जा रही हैं.

आईपी गुप्ता की भूमिका पर नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आईपी गुप्ता की हैदराबाद यात्रा महज औपचारिक नहीं थी, बल्कि यह एक रणनीतिक पहल हो सकती है. उनकी पार्टी इंडियन इंक्लूसिव पार्टी महागठबंधन का हिस्सा है और वे स्वयं सहरसा से विधायक हैं. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे AIMIM के विधायकों को महागठबंधन के पक्ष में लाने में सफल हो पाते हैं.

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