बिहार विधानसभा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर हंगामा, PMAY में लाभुकों से वसूली का आरोप

PM Awas Yojana : बिहार विधानसभा में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में कथित अनियमितताओं और लाभुकों से वसूली के आरोपों को लेकर जोरदार बहस हुई. कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से भ्रष्टाचार, भेदभाव और पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप उठाए.

गोपालगंज में 25% वसूली का आरोप

विधानसभा में एक सदस्य ने आरोप लगाया कि गोपालगंज जिले के सिधवलिया प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत लाभुकों से 25 प्रतिशत तक की अवैध वसूली की जा रही है. सदस्य ने दावा किया कि उनके पास इसका वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध है. उन्होंने मंत्री से मांग की कि संबंधित पंचायत में प्रश्नकर्ता सदस्य की उपस्थिति में जांच कराई जाए. एक अन्य सदस्य ने कहा कि आवास सहायक द्वारा लाभुक से पैसे मांगने का ऑडियो-वीडियो उनके पास है, जिसे उन्होंने जिलाधिकारी को भेजा है. आरोप है कि शिकायत करने वाले लाभुक को प्रताड़ित भी किया जा रहा है.

दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

आरोपों को लेकर मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि जहां-जहां से शिकायतें मिलेंगी, वहां सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि किसी सदस्य के पास किसी विशेष पंचायत की जानकारी है, तो वह लिखित रूप में दें, संबंधित अधिकारी से जांच कराई जाएगी और शिकायतकर्ता सदस्य को भी जांच प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी अधिकारी द्वारा पैसे मांगने की पुष्टि होने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.

असर्वेक्षित भूमि पर आवास योजना का मुद्दा

बिहार शरीफ के विधायकों ने यह मुद्दा उठाया कि शहर की लगभग 60 प्रतिशत भूमि असर्वेक्षित है. नियमों के कारण ऐसे भूखंडों पर वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, भले ही उनके पास नगर निगम की रसीद, बिजली बिल और राशन कार्ड हो. नगर परिषद गोगरी और मानसी क्षेत्र के मामलों का भी जिक्र किया गया, जहां दशकों से रह रहे परिवार केवल रसीद या भूमि अभिलेख के अभाव में योजना से वंचित हैं.

‘एक्सेप्टेड’ और ‘डिस्प्यूटेड’ सूची पर सवाल

मंत्री ने बताया कि राज्य में सर्वेक्षण के बाद डिस्प्यूटेड (विवादित) और एक्सेप्टेड (स्वीकृत) की दो सूचियां बनाई गई हैं. सदस्यों ने आरोप लगाया कि कई पंचायतों में राजनीतिक या स्थानीय दबाव के कारण पात्र लोगों के नाम काटे गए हैं. उन्होंने राज्यस्तरीय उच्चस्तरीय जांच और पुनः सर्वेक्षण की मांग की, ताकि कोई भी वास्तविक लाभुक वंचित न रह जाए. मंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर सहयोग का अनुरोध किया गया था. उन्होंने कहा कि यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो संबंधित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी निगरानी करनी चाहिए थी. उन्होंने दोहराया कि सरकार की मंशा है कि कोई भी पात्र गरीब योजना से वंचित न रहे और शिकायत मिलने पर त्वरित जांच सुनिश्चित की जाएगी.

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