सवर्ण चेहरे के साथ BJP कर रही सरप्राइज की तैयारी..! लेकिन अगर ऐसा हुआ तो राजपूत और ब्राह्मण को छोड़ इस जाति का होगा CM

bihar next cm : बिहार की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल देखने को मिल रही है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री पद पर बड़ा बदलाव हो सकता है और मौजूदा मुख्यमंत्री Nitish Kumar मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अगर सत्ता परिवर्तन होता है तो क्या राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनेगा और क्या पार्टी कोई नया या अप्रत्याशित चेहरा सामने ला सकती है।

बीजेपी के सरप्राइज फैसलों की चर्चा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Bharatiya Janata Party का काम करने का तरीका अक्सर चौंकाने वाला रहा है। पिछले कुछ राज्यों में चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया, जिनके नाम पहले चर्चा में भी नहीं थे। उदाहरण के तौर पर Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Haryana और Odisha जैसे राज्यों में पार्टी ने अपेक्षाकृत नए चेहरों को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी। इसी कारण बिहार में भी किसी अप्रत्याशित नाम की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

सवर्ण चेहरे पर भी चर्चा

हाल के समय में कुछ नीतिगत फैसलों को लेकर सवर्ण समाज के बीच असंतोष की चर्चा भी सामने आई है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी सामाजिक संतुलन साधने के लिए किसी सवर्ण नेता को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दे सकती है। हालांकि बिहार की जटिल जातीय राजनीति को देखते हुए पार्टी के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। किसी एक वर्ग को आगे बढ़ाने से अन्य सहयोगी दलों और सामाजिक समूहों की प्रतिक्रिया भी अहम मानी जा रही है।

किन नेताओं के नाम चर्चा में

मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों को लेकर कई नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं। इनमें प्रमुख रूप से सम्राट चौधरी,विजय कुमार सिन्हा,नित्यानंद राय,संजय जायसवाल ,दिलीप जायसवाल ,नितिन मिश्रा ,नीतीश मिश्रा और संजीव चौरसिया शामिल हैं. इनमें से कुछ नेता संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं तो कुछ का प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव मजबूत माना जाता है।

गठबंधन की राजनीति भी बड़ी चुनौती

बिहार में सत्ता का समीकरण केवल एक पार्टी से तय नहीं होता। यहां गठबंधन की राजनीति अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में किसी भी नए मुख्यमंत्री के चयन में सहयोगी दलों की सहमति और सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखना जरूरी होगा। विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ऐसा चेहरा सामने ला सकती है जो आक्रामक छवि के बजाय संतुलित और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला नेता हो। फिलहाल बिहार की राजनीति में कयासों का दौर जारी है। यदि सत्ता परिवर्तन होता है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी अनुभवी चेहरे पर भरोसा करती है या फिर किसी बिल्कुल नए नेता को आगे लाकर राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश करती है।

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