Nitish Kumar : बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष Nitish Kumar ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के एक दिन बाद पार्टी नेताओं और विधायकों की बैठक में स्पष्ट किया कि वह सक्रिय राजनीति से दूर नहीं जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं और आगे भी पार्टी का मार्गदर्शन करते रहेंगे तथा बिहार सरकार के कामकाज पर नजर बनाए रखेंगे. इस बीच जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Kumar Jha ने घोषणा की कि नीतीश कुमार के बेटे Nishant Kumar बहुत जल्द औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होंगे. इसके बाद वह बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर राज्य में सुशासन की कार्यप्रणाली को समझेंगे और उसका आकलन करेंगे. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद नई सरकार में निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.
विधायकों की बैठक में क्या हुआ
शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर जदयू के विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों की बैठक बुलाई गई थी. यह बैठक उस समय हुई जब पार्टी के भीतर कुछ नेताओं में उनके राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर असंतोष और बेचैनी देखी जा रही थी. बैठक के दौरान कई नेताओं ने उनसे अपना निर्णय बदलने का आग्रह किया. पार्टी कार्यकर्ताओं का एक समूह मुख्यमंत्री आवास के बाहर पोस्टकार्ड लेकर बैठा था जिसमें लिखा था कि यह 2025 के जनादेश के साथ विश्वासघात है. दूसरे में सवाल किया गया कि अगर एनडीए का नारा 2025 से 2030, फिर से नीतीश था तो फिर वह बीच में ही बिहार क्यों छोड़ रहे हैं.
बिहार और दिल्ली के बीच समय बांटूंगा : नीतीश
भावुक माहौल के बीच नीतीश कुमार ने पार्टी नेताओं को भरोसा दिलाया कि वह बिहार की राजनीति से दूर नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि मैं कहीं नहीं जा रहा हूं. मैं बिहार और दिल्ली के बीच अपना समय बांटूंगा. बिहार के विकास के लिए पहले की तरह काम करता रहूंगा. पार्टी का मार्गदर्शन करूंगा और सरकार के कामकाज की समीक्षा भी करता रहूंगा. उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में निकाली गई समृद्धि यात्रा के दौरान जिन जिलों में वह नहीं जा सके, वहां भी जल्द जाएंगे.
निशांत के राजनीति में आने की मांग
बैठक के दौरान कई विधायकों और सांसदों ने निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग भी उठाई. उनका कहना था कि वह ही पार्टी को एकजुट रख सकते हैं. बैठक के बाद जदयू के मुख्य प्रवक्ता Neeraj Kumar ने कहा कि जब निशांत कुमार के राजनीति में आने का प्रस्ताव रखा गया तो पार्टी नेताओं ने उसका जोरदार स्वागत किया. उन्होंने बताया कि अगले कुछ दिनों में निशांत कुमार औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हो जाएंगे.
पार्टी को निशांत की जरूरत
जदयू के मंत्री Shravan Kumar ने कहा कि कई नेता भावुक होकर नीतीश कुमार से अपना फैसला बदलने का आग्रह कर रहे थे. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने हमें भरोसा दिलाया कि वह हमेशा पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए उपलब्ध रहेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि लोकसभा, बिहार विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रहने के बाद उनकी इच्छा राज्यसभा में भी प्रतिनिधित्व करने की थी. जदयू विधायक Vinay Choudhary ने कहा कि कार्यकर्ता चाहते थे कि निशांत राजनीति में आएं, लेकिन नीतीश कुमार के बिहार में रहते हुए. उन्होंने कहा कि जनता के बीच नीतीश कुमार के इस फैसले को समझाना फिलहाल चुनौतीपूर्ण है, लेकिन पार्टी उनके फैसले का सम्मान करेगी. पपप
नीतीश के नेतृत्व में जदयू का राजनीतिक सफर
बिहार की राजनीति में दो दशकों से अधिक समय तक प्रभाव बनाए रखने वाले नीतीश कुमार राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं. वह अब तक दस बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं. साल 2003 में Samata Party का विलय Janata Dal (United) में हुआ था. इसके बाद अक्टूबर 2005 के विधानसभा चुनावों में एनडीए के साथ सरकार बनाकर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने और यहीं से जदयू के राजनीतिक सफर को नई गति मिली. 2010 के विधानसभा चुनाव में 243 सीटों में से जदयू ने 115 सीटें जीती थीं, जबकि सहयोगी Bharatiya Janata Party को 91 सीटें मिली थीं. 2015 के चुनाव में जदयू ने Rashtriya Janata Dal और Indian National Congress के साथ गठबंधन किया था, जिसमें जदयू को 71 सीटें और राजद को 80 सीटें मिली थीं. हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा और उसे केवल 43 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने 74 सीटें जीतीं. इसके बाद 2025 के चुनाव में जदयू ने वापसी करते हुए 85 सीटें हासिल कीं, हालांकि भाजपा 89 सीटों के साथ राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.