राज्यसभा में जीरो फिर भी चुप्पी…मुख्यमंत्री को लेकर भी सस्पेंस, बिहार की सियासी उथल-पुथल पर चिराग पासवान क्यों है खामोश

Chirag Paswan : बिहार की राजनीति इन दिनों लगातार उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव के बीच सियासी समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं. खास तौर पर पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो गया है, जहां जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन का आंकड़ा अहम माना जा रहा है. राज्य की राजनीतिक चर्चा में एक बड़ा सवाल यह भी है कि इस पूरे घटनाक्रम में चिराग पासवान की भूमिका क्या होगी. अभी तक इस मुद्दे पर उनकी ओर से कोई खुला बयान नहीं आया है, लेकिन उनकी चुप्पी को राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.

नीतीश कुमार जा रहे राज्यसभा

मुख्यमंत्री Nitish Kumar द्वारा राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद बिहार की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है. इसके साथ ही यह चर्चा भी तेज हो गई कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. इसी बीच राज्यसभा की सीटों के बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के बीच भी चर्चाएं तेज हो गईं. Chirag Paswan की पार्टी के पास विधानसभा में 19 विधायक हैं, इसलिए यह माना जा रहा था कि उन्हें राज्यसभा की एक सीट मिल सकती है. यहां तक कि कुछ चर्चाओं में उनकी मां रीना पासवान का नाम भी सामने आया था, हालांकि पार्टी ने बाद में इन अटकलों को खारिज कर दिया.

विधानसभा में 19 विधायक लेकिन राज्यसभा में प्रतिनिधित्व शून्य

चिराग पासवान की पार्टी ने हाल के विधानसभा चुनाव में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था. शून्य से बढ़कर पार्टी के 19 विधायक विधानसभा में पहुंचे. लेकिन इसके बावजूद राज्यसभा में पार्टी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. अब एनडीए समर्थित उम्मीदवार के रूप में Upendra Kushwaha का नाम सामने आने से समीकरण और जटिल हो गए हैं. अगर उन्हें जीतना है तो अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी, क्योंकि जीत के लिए 41 वोटों का आंकड़ा जरूरी है. इस सीट को लेकर विपक्षी दलों ने भी दावा किया है कि उनके पास जरूरी समर्थन है. महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि उनके पास 41 विधायकों का आंकड़ा मौजूद है, जबकि एनडीए के पास अभी कम वोट हैं और उन्हें अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा.

चिराग पासवान की रणनीति पर नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे समीकरण में चिराग पासवान की भूमिका निर्णायक हो सकती है. अगर उनकी पार्टी के विधायक अलग रुख अपनाते हैं या मतदान से दूरी बनाते हैं तो एनडीए के लिए समीकरण मुश्किल हो सकते हैं. हालांकि यह भी सवाल उठ रहा है कि चिराग पासवान को इस राजनीतिक समीकरण में आखिर मिल क्या रहा है. पहले चर्चा थी कि उनकी पार्टी से एक उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि नई सरकार के गठन या मंत्रिमंडल विस्तार में उनकी पार्टी को ज्यादा अहम भूमिका मिल सकती है.

बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका की इच्छा

चिराग पासवान कई बार सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि वे बिहार की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होना चाहते हैं. हालांकि फिलहाल वे केंद्र सरकार में मंत्री हैं, जिसकी वजह से उनका अधिक समय दिल्ली में ही बीतता है. ऐसे में यह भी देखा जा रहा है कि आने वाले समय में क्या उन्हें राज्य स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है या उनकी पार्टी को सरकार में अधिक प्रतिनिधित्व मिलता है. राज्यसभा चुनाव के नतीजे और उसके बाद होने वाले राजनीतिक फैसले यह तय करेंगे कि बिहार की सत्ता के समीकरण किस दिशा में जाएंगे. फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चिराग पासवान इस पूरे घटनाक्रम में किस तरह की राजनीतिक चाल चलते हैं.

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