राज्यसभा चुनाव में तेजस्वी यादव को चाहिए भाजपा की बी टीम का साथ…! समझिए कितना अहम है महागठबंधन के लिए AIMIM का समर्थन

Bihar Politics : बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. इस बीच महागठबंधन और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बीच संभावित नजदीकियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. हालांकि पार्टी प्रमुख Asaduddin Owaisi सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन उनकी पार्टी को मनाने के प्रयास जारी बताए जा रहे हैं.

AIMIM की इफ्तार पार्टी पर नजर

राजद नेता Tejashwi Yadav अपने उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचाने के लिए हर संभव रणनीति पर काम कर रहे हैं. इसी कड़ी में AIMIM की ओर से 15 मार्च को पटना में आयोजित इफ्तार पार्टी को भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. इस कार्यक्रम में तेजस्वी यादव को भी आमंत्रित किया गया है. राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि इस मौके पर तेजस्वी यादव और असदुद्दीन ओवैसी एक साथ नजर आ सकते हैं.

आगे की रणनीति पर बातचीत जारी

दिलचस्प बात यह है कि कुछ महीने पहले तक तेजस्वी यादव, ओवैसी की पार्टी को भारतीय जनता पार्टी की बी टीम बताया करते थे. उस समय राजद ने AIMIM के चार विधायकों को अपने पाले में भी कर लिया था. लेकिन अब राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं और राज्यसभा चुनाव में समर्थन के लिए AIMIM महत्वपूर्ण भूमिका में दिख रही है. इस बीच AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष Akhtarul Iman ने बुधवार को तेजस्वी यादव से मुलाकात की. मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत सकारात्मक रही है और आगे भी चर्चा जारी रहेगी. तेजस्वी यादव ने भी मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए कहा कि उन्हें इफ्तार पार्टी का निमंत्रण मिला है और वे इसमें शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति पर बातचीत जारी रहेगी और सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा.

AIMIM का समर्थन महागठबंधन के लिए बेहद अहम

राजनीतिक गणित की बात करें तो बिहार में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत है. राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास फिलहाल 35 वोट हैं. वहीं AIMIM के पांच और बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक हैं. ऐसे में AIMIM का समर्थन महागठबंधन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. दूसरी ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने Upendra Kushwaha को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है. कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के पास बिहार विधानसभा में चार विधायक हैं. ऐसे में एनडीए को भी जीत सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी.

अब सबकी नजर 15 मार्च को होने वाली इफ्तार पार्टी और आगे होने वाली राजनीतिक बातचीत पर टिकी है. सवाल यही है कि क्या इस बार AIMIM, तेजस्वी यादव का साथ देगी या बिहार की राजनीति में कोई नया मोड़ देखने को मिलेगा.

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