मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते बुझ सकती है आपके घर की रसोई…! आसान भाषा में समझिए भारत में LPG संकट का असली कारण

India LPG crisis : मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब भारत तक दिखाई देने लगा है. हजारों किलोमीटर दूर हो रही मिसाइल और एयर स्ट्राइक की गूंज भारत की रसोई तक पहुंच रही है. देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडर की मांग अचानक बढ़ गई है और सप्लाई को लेकर चिंता पैदा हो गई है. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने एलपीजी से जुड़े मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू करते हुए गैस वितरण के नियमों में बदलाव कर दिया है.

गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें

उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. कई जगह लोग सिलेंडर की एडवांस बुकिंग कर रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं. राजस्थान सहित कुछ राज्यों में सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग की खबरें भी मिली हैं. सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पहले गैस उपलब्ध हो. इसी कारण आपूर्ति पर नियंत्रण के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत हस्तक्षेप किया गया है.

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम

1955 में लागू किया गया आवश्यक वस्तु अधिनियम एक ऐसा कानून है जिसके जरिए सरकार देश में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को नियंत्रित कर सकती है. यह कानून आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था. आपातकालीन परिस्थितियों जैसे युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अचानक कीमतों में तेज वृद्धि के दौरान सरकार इस कानून के तहत कई कदम उठा सकती है, जैसे:

  • उत्पादन बढ़ाने के निर्देश देना
  • सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित करना
  • स्टॉक लिमिट तय करना
  • जमाखोरी और कालाबाजारी पर कार्रवाई करना

कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी इस कानून का व्यापक इस्तेमाल किया गया था.

एलपीजी सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार के निर्देश

सरकार ने रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों का इस्तेमाल अन्य उद्योगों की बजाय एलपीजी उत्पादन में करें ताकि घरेलू कुकिंग गैस की सप्लाई बढ़ाई जा सके. इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि उत्पादित एलपीजी सीधे देश की तीन सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को दी जाएगी. इन्हीं कंपनियों के जरिए देश में एलपीजी वितरण का अधिकांश हिस्सा संचालित होता है.

गैस बुकिंग के नियमों में बदलाव

सरकार ने सिलेंडर बुकिंग से जुड़े नियम भी सख्त कर दिए हैं. नए नियमों के अनुसार एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर कम से कम 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा. डिलीवरी के समय ओटीपी या बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा. इन कदमों का उद्देश्य फर्जी बुकिंग और जमाखोरी को रोकना है. जानकारी के लिए बता दें कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है. देश में इस्तेमाल होने वाली गैस का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है. वर्ष 2024-25 में भारत ने लगभग 31.3 मिलियन टन एलपीजी का उपयोग किया, जिसमें से करीब 12.8 मिलियन टन ही घरेलू उत्पादन था. यानी कुल मांग का लगभग 60% हिस्सा आयात करना पड़ता है और इसका बड़ा भाग खाड़ी देशों से आता है.

होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. लगभग 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के लगभग 20% पेट्रोलियम का परिवहन इसी रास्ते से होता है. भारत के लिए यह रास्ता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपने कच्चे तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है. युद्ध के कारण कई तेल टैंकर इस मार्ग से गुजरने से बच रहे हैं, जिससे सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. तनाव बढ़ने के बाद कतर के कुछ एलएनजी उत्पादन संयंत्रों में अस्थायी रुकावट की खबरें भी सामने आई हैं. भारत अपनी कुल एलएनजी जरूरत का लगभग 40% कतर से आयात करता है. ऐसे में उत्पादन में किसी भी तरह की कमी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है.

होटल और छोटे कारोबार पर असर

कमर्शियल सेक्टर में गैस की कमी का असर ज्यादा दिखने लगा है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में होटल और रेस्टोरेंट को सिलेंडर मिलने में दिक्कतें आ रही हैं. कई छोटे होटल और ढाबे अपने कामकाज को सीमित करने के लिए मजबूर हैं. आंध्र प्रदेश में होटल मालिकों का कहना है कि गैस सप्लाई 40 से 50 प्रतिशत तक कम हो गई है. सड़क किनारे चाय की दुकानें और छोटे खाद्य व्यवसाय भी इस संकट को लेकर चिंतित हैं. फिलहाल स्थिति पर सरकार नजर बनाए हुए है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष जल्द खत्म हो जाता है तो सप्लाई सामान्य हो सकती है. लेकिन अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता दोनों पर दबाव बढ़ सकता है. सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में सिलेंडर की अतिरिक्त बुकिंग या जमाखोरी न करें और आधिकारिक सलाह का पालन करें.

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