UPSC Controversy : देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Union Public Service Commission (UPSC) का रिजल्ट हर साल लाखों युवाओं और उनके परिवारों के लिए सपनों के सच होने जैसा होता है. इस बार भी परिणाम घोषित होते ही देशभर में जश्न का माहौल बन गया, मिठाइयाँ बांटी गईं, फूल-मालाएँ पहनाई गईं और जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों ने सफल अभ्यर्थियों को बधाई दी. हालांकि इस बार कई ऐसे मामले भी सामने आए जिन्होंने उत्साह के बीच हैरानी और विवाद पैदा कर दिया. कई जगहों पर एक ही रैंक को लेकर दो-दो दावेदार सामने आ गए. जांच के बाद जब सच्चाई सामने आई तो कई परिवारों का जश्न शर्मिंदगी में बदल गया.
बिहार में फर्जी रैंक का दावा
पहला मामला Bihar के Sheikhpura जिले से सामने आया. रंजीत कुमार नाम के युवक ने दावा किया कि उसे सिविल सेवा परीक्षा में 440वीं रैंक मिली है. खबर फैलते ही गांव में जश्न शुरू हो गया. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से उसका सम्मान भी किया. लेकिन जब आधिकारिक सूची की जांच हुई तो पता चला कि 440वीं रैंक Karnataka के एक अन्य रंजीत के नाम दर्ज है. इसके बाद बिहार का रंजीत फरार हो गया और उसका मोबाइल फोन भी बंद बताया जा रहा है. पुलिस अब उसी युवक की तलाश कर रही है जिसे कुछ दिन पहले सम्मानित किया गया था.
एक ही रैंक पर दो आकांक्षा सिंह
दूसरा मामला 301वीं रैंक को लेकर सामने आया. Ghazipur की आकांक्षा सिंह और Arrah की आकांक्षा सिंह, दोनों ने एक ही रैंक मिलने का दावा किया. बाद में UPSC की स्पष्टता के बाद गाजीपुर की अभ्यर्थी का दावा सही पाया गया, जबकि आरा की अभ्यर्थी का दावा गलत निकला.
बुलंदशहर की शिखा से उत्साह में गलती
Bulandshahr की शिखा गौतम ने भी रिजल्ट में अपना नाम देखकर 113वीं रैंक मिलने की खुशी परिवार के साथ साझा कर ली. स्वागत समारोह तक हो गया, लेकिन बाद में रोल नंबर मिलाने पर पता चला कि यह रैंक Rohtak की दूसरी शिखा के नाम है. शिखा ने बाद में सफाई दी कि उन्होंने केवल नाम देखा था और उत्साह में रोल नंबर चेक नहीं किया, यह जानबूझकर किया गया धोखा नहीं बल्कि गंभीर चूक थी.
भावुक कहानी भी निकली गलतफहमी
एक और चर्चित मामला Ghazipur से जुड़ा रहा. प्रियंका चौधरी नाम की युवती को 79वीं रैंक मिलने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. उनके पिता का भावुक बयान लोगों को खूब प्रभावित कर गया. हालांकि बाद में पता चला कि 79वीं रैंक Rajasthan की दूसरी प्रियंका के नाम है. यूपी की प्रियंका फिलहाल Prayagraj में GST इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं.
क्यों होती हैं ऐसी घटनाएँ?
इन सभी मामलों में जो समान कारण सामने आए उनमें है भारत में एक जैसे नाम बहुत आम होना, रिजल्ट देखने में जल्दबाजी करना, सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि खबर फैलाना और कुछ मामलों में जानबूझकर गलत दावा करने की आशंका. विशेषज्ञों का कहना है कि UPSC या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम चेक करते समय केवल नाम नहीं, बल्कि रोल नंबर, जन्मतिथि और राज्य अवश्य मिलाना चाहिए.