फैसल रहमान को पसंद नहीं आई AIMIM और RJD की दोस्ती..! मतदान से दूरी की क्या है असली वजह

Faisal Rehman : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सोमवार को हुए मतदान में कुल 239 विधायकों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. इनमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के 202 और महागठबंधन के 37 विधायक शामिल रहे. हालांकि महागठबंधन के चार विधायक मतदान प्रक्रिया से दूर रहे, जिनमें कांग्रेस के तीन और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के एक विधायक फैसल रहमान शामिल हैं. जानकारी के अनुसार कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास ने भी मतदान नहीं किया. इन चार विधायकों की अनुपस्थिति के कारण महागठबंधन के वोटों की संख्या 37 पर ही सिमट गई.

178 वोटों से जीते थे फैसल रहमान

इस बीच आरजेडी विधायक फैसल रहमान के मतदान में हिस्सा न लेने को लेकर सियासी हलकों में विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. आधिकारिक तौर पर इसे पारिवारिक कारण बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसके पीछे अन्य संभावित कारण भी तलाश रहे हैं. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में ढाका विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार पवन जायसवाल को फैसल रहमान ने महज 178 वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी. मुस्लिम बहुल इस सीट पर चुनावी मुकाबलों में अक्सर सामुदायिक ध्रुवीकरण की चर्चा होती रही है. हालांकि इस बार चुनाव जीतने के लिए रहमान ने अपनी रणनीति में बदलाव किया था, जिसका परिणाम उन्हें मिला. चुनाव के दौरान छठ घाट पर पूजा करते हुए उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.

क्या है असली कारण

उधर दावा यह भी किया जा रहा है कि फैसल रहमान को ओवैसी की पार्टी AIMIM और आरजेडी की एकता पसंद नहीं आई. दअसल बिहार विधानसभा चुनाव में ओवैसी ने अपना पहला उम्मीदवार ढाका से खड़ा किया था. AIMIM ने राजपूत समाज से राणा रंजीत को अपना उम्मीदवार बनया था और ओवैसी ने ढाका जाकर प्रचार भी किया. हालांकि राणा रंजीत को 5730 वोट मिले और वो चुनाव हार गए. इसका नुकसान फैसल रहमान को हुआ. क्योंकि राणा रंजीत को मिले वोट में मुस्लिमों के वोट भी शामिल थे. तब AIMIM और आरजेडी विरोधी हुआ करते थे और अब राज्यसभा चुनाव के लिये ओवैसी की पार्टी और आरजेडी की एकता हो गई . हो सकता है ये बात फैसल रहमान को ये पसंद न आई हो . इस कारण से राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ढाका सीट पर पिछला चुनावी गणित और विभिन्न दलों के बीच बदलते समीकरण भी फैसल रहमान के निर्णय के पीछे एक कारक हो सकते हैं. इसके अलावा इस सीट पर जीत-हार को लेकर अदालत में संभावित कानूनी दावों की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि भविष्य की राजनीतिक और कानूनी रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए भी यह फैसला लिया गया हो सकता है.

हालांकि फिलहाल पार्टी या विधायक की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. राजनीतिक पर्यवेक्षक इस पूरे घटनाक्रम को आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और प्रयोगों के संकेत के रूप में देख रहे हैं.

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