Share market news : 23 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को एक ही दिन में लगभग 13 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. सेंसेक्स करीब 1900 अंकों की गिरावट के साथ खुला और दिन के अंत तक 72,696 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 22,500 के नीचे फिसल गया. बाजार की इस गिरावट के पीछे वैश्विक अनिश्चितता, खासकर अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है. मौजूदा परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि वैश्विक घटनाक्रमों का असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर तेजी से और व्यापक रूप से पड़ता है. आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी.
अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है भारत
विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध जैसे हालात निवेशकों के विश्वास को कमजोर करते हैं. अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक जोखिम वाले एसेट्स जैसे शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों जैसे बॉन्ड और डॉलर की ओर रुख करते हैं. इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार निकासी भी गिरावट का एक बड़ा कारण है. भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर ऊर्जा क्षेत्र के माध्यम से पड़ रहा है. देश अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई और कंपनियों की लागत दोनों बढ़ती हैं. इसका असर पेट्रोल, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है.
डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर भारतीय रुपया
इसी बीच, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है. रुपये में गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं, तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की निकासी और डॉलर की वैश्विक मजबूती. डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव और बढ़ जाता है. दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर संकट के समय सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी जा रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में हाल ही में करीब 9% और चांदी में 10% से अधिक की गिरावट आई है. इसका मुख्य कारण हाल के महीनों में इनकी कीमतों का अत्यधिक बढ़ जाना और अब निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करना है.
Share Market हुआ धड़ाम
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में संभावित वृद्धि भी सोने की मांग को प्रभावित कर रही है. जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने की बजाय फिक्स्ड इनकम विकल्पों जैसे एफडी और बॉन्ड को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इनमें निश्चित रिटर्न मिलता है. शेयर बाजार में गिरावट के कारण निवेशकों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी सोना और चांदी बेचे जा रहे हैं, जिससे इनके दाम और नीचे आ रहे हैं. युद्ध का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि और व्यापार पर भी पड़ रहा है. भारत अपने लगभग 30% उर्वरक आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है. सप्लाई प्रभावित होने पर खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, जहाजों को लंबा रास्ता अपनाने के कारण परिवहन और बीमा लागत भी बढ़ रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि देश के पास सीमित अवधि के लिए पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति जारी है, लेकिन यदि वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव और गहरा हो सकता है.