Bihar next cm : बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक, हर कोई अपने-अपने दावे और कयास लगा रहा है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. हालिया अटकलों के बीच यह भी कहा जा रहा है कि इस बार मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पास जा सकता है, जबकि जेडीयू को उपमुख्यमंत्री पद मिल सकता है. ऐसी चर्चाएं भी हैं कि Nitish Kumar राज्यसभा जाकर सक्रिय राज्य राजनीति से दूरी बना सकते हैं, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है.
जाति आधारित राजनीति के बीच चयन का सवाल
बिहार की राजनीति लंबे समय से जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. ऐसे में यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है कि मुख्यमंत्री का चयन काम के आधार पर होगा या जातीय समीकरणों और पार्टी नेतृत्व के फैसले से तय होगा.
1990 के बाद सवर्ण मुख्यमंत्री नहीं
राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो 1990 में Lalu Prasad Yadav के सत्ता में आने के बाद से बिहार में कोई सवर्ण मुख्यमंत्री नहीं बना है. उससे पहले Jagannath Mishra राज्य के आखिरी सवर्ण मुख्यमंत्री थे. करीब तीन दशक से अधिक समय बीतने के बाद अब फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या बिहार में सवर्ण मुख्यमंत्री बन सकता है. इस बहस को एक नया मोड़ तब मिला जब एक राजनीतिक बयान में Rajiv Ranjan Singh (Lalan Singh) का नाम मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में सामने आया. उन्हें समाजवादी पृष्ठभूमि का नेता बताते हुए आगे बढ़ाने की बात कही गई. हालांकि जैसे ही उनका नाम सामने आया, उनकी जाति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई, जिससे सवर्ण बनाम पिछड़ा राजनीति का मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया.
सवर्ण राजनीति की सीमाएं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सवर्ण समुदाय का प्रभाव अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके पास ऐसा कोई सर्वमान्य नेता नहीं है जो पूरे राज्य में व्यापक जनाधार रखता हो. विशेषज्ञों के अनुसार सवर्ण नेता विभिन्न दलों में मौजूद हैं,लेकिन कोई एक सुप्रीमो चेहरा नहीं उभर पाया, यही कारण है कि वे सत्ता के शीर्ष पद तक नहीं पहुंच पा रहे.
क्या बीजेपी करेगी नया प्रयोग?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बीजेपी बिहार में कोई नया राजनीतिक प्रयोग करेगी. उत्तर प्रदेश जैसे मॉडल की चर्चा भी हो रही है, जहां सामाजिक समीकरणों के आधार पर नेतृत्व तय किया गया. बिहार की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, जहां इसकी सीमाएं Uttar Pradesh, West Bengal और Jharkhand से जुड़ी हैं ऐसा नेतृत्व चुनने की संभावना पर भी विचार हो रहा है जिसका प्रभाव पड़ोसी राज्यों पर भी पड़े. बिहार में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन इतना तय है कि जातीय समीकरण, राजनीतिक रणनीति और केंद्रीय नेतृत्व, तीनों मिलकर इस फैसले को प्रभावित करेंगे. अब देखने वाली बात होगी कि क्या बिहार में लंबे समय बाद कोई सवर्ण मुख्यमंत्री बनता है या फिर पारंपरिक सामाजिक समीकरण ही कायम रहते हैं.