Marital Rape Law : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति-पत्नी के बीच होने वाले ओरल या एनल सेक्स को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत अप्राकृतिक यौन अपराध नहीं माना जाएगा. यह टिप्पणी जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने एक वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की.
क्या है मामला?
मामला भिंड जिले का है, जहां 2023 में एक महिला ने अपने पति के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे. इनमें दहेज उत्पीड़न, मारपीट और अननेचुरल सेक्सुअल एब्यूज शामिल थे. इस आधार पर पुलिस ने IPC की विभिन्न धाराओं 377, 498A, 354 और Dowry Prohibition Act के तहत एफआईआर दर्ज की थी.
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों को सही भी मान लिया जाए, तब भी वे पति-पत्नी के वैवाहिक संबंधों के दायरे में आते हैं. IPC की धारा 375 (रेप) के अपवाद के अनुसार, पति द्वारा अपनी बालिग पत्नी के साथ बनाए गए यौन संबंध को रेप नहीं माना जाता. इसी आधार पर ऐसे मामलों में धारा 377 लागू नहीं की जा सकती. कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप prima facie धारा 377 के तहत अपराध नहीं बनाते, इसलिए इस धारा के तहत की गई कार्रवाई को रद्द किया जाता है.
किन आरोपों पर बनी रहेगी कार्रवाई?
हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दहेज उत्पीड़न (498A),शारीरिक हिंसा, धमकी और दूसरे सभी आरोप पर कार्रवाई जारी रहेगी और ट्रायल के दौरान इन पर विचार किया जाएगा. अदालत ने यह भी कहा कि मामले में मेडिकल साक्ष्यों की कमी और बयानों में कुछ असंगतियां हैं, जिन्हें ट्रायल के दौरान परखा जाएगा.
यौन अपराध के लिए क्या है कानून
- IPC धारा 375: रेप से संबंधित है, लेकिन इसके अपवाद में पति-पत्नी के बीच यौन संबंध को बाहर रखा गया है (यदि पत्नी बालिग है).
- IPC धारा 377: अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध मानती है, जिसमें 10 साल तक की सजा या उम्रकैद का प्रावधान है.
यह फैसला एक बार फिर वैवाहिक संबंधों में सहमति और कानून की सीमाओं को लेकर बहस को सामने लाता है. हालांकि कोर्ट ने अननेचुरल सेक्स के आरोप को खारिज कर दिया है, लेकिन घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों पर सुनवाई जारी रहेगी.
सोर्स : मीडिया रिपोर्ट