Bihar tender policy : बिहार कैबिनेट की बुधवार को हुई एक बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया. राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से इसे बड़ा कदम माना जा रहा है. बैठक में Samrat Choudhary की अगुवाई वाली सरकार ने तय किया है कि ₹25 लाख से लेकर ₹50 करोड़ तक के सरकारी सिविल कार्यों के टेंडर अब मुख्य रूप से बिहार के निवासियों और स्थानीय कंपनियों को ही दिए जाएंगे.
क्या है नया नियम?
नए प्रावधान के अनुसार ₹25 लाख से ₹50 करोड़ तक के सिविल कार्यों के लिए केवल बिहार में रजिस्टर्ड ठेकेदार ही पात्र होंगे. इसके साथ साथ जिन कंपनियों में कम से कम 51% शेयर बिहार के निवासियों के पास होंगे, वे भी टेंडर के लिए योग्य होंगी.वहीं बाहरी कंपनियों को तभी मौका मिलेगा जब राज्य के भीतर से कोई योग्य बोलीदाता उपलब्ध नहीं होगा. इस फैसले को लागू करने के लिए बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन करते हुए एक नई धारा (कंडिका 163) जोड़ने की मंजूरी दी गई है.
सरकार का तर्क
राज्य सरकार का मानना है कि इस कदम से जहां एक तरफ स्थानीय ठेकेदारों को अधिक अवसर मिलेंगे वहीं रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे. इसके साथ साथ परियोजनाओं का क्रियान्वयन भी तेज होगा और बाहरी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी. सरकार इसे अपने रोजगार सृजन अभियान, खासकर 7 निश्चय कार्यक्रम के तहत अगले पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर नौकरी के अवसर पैदा करने की दिशा में अहम कदम बता रही है. कूल मिलाकर ₹50 करोड़ तक के टेंडर में स्थानीय भागीदारी बढ़ाने का यह निर्णय बिहार के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीति बदलाव है.
कैबिनेट में अन्य बड़े फैसले
कैबिनेट बैठक में इस फैसले के अलावा भी कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. जैसे…
- बिहार पुलिस में 10,469 पदों पर भर्ती
- 9,152 शिक्षकों और शिक्षा कर्मियों की नियुक्ति
- 208 प्रखंडों में नए कॉलेज खोलने की स्वीकृति
- मॉडल स्कूल विकसित करने के लिए ₹800 करोड़ का प्रावधान
- निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों के लिए नई फीस और नामांकन नीति