Bihar road accidents : बिहार में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट की चिंता के बीच बिहार पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है. अब राज्य के चार और छह लेन वाले हाईवे पर पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी, रडार गन से वाहनों की गति पर नजर रखी जाएगी और नियम तोड़ने वालों को तुरंत ई-चालान भेजा जाएगा. बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात एवं कानून व्यवस्था) Sudhanshu Kumar ने बताया कि राज्य के 6,300 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर फिलहाल 63 गश्ती वाहन तैनात हैं. जून के अंत तक 58 और वाहन शामिल किए जाएंगे ताकि हर 50 किलोमीटर के हिस्से पर एक गश्ती वाहन मौजूद रहे. उन्होंने कहा कि प्रत्येक वाहन में एक पुलिस अधिकारी, दो कांस्टेबल और चालक मौजूद होंगे. इसके अलावा वाहनों में फोल्डेबल स्ट्रेचर, गैस कटर और सोलर पैनल से चलने वाला जनरेटर भी लगाया जाएगा, ताकि सड़क हादसों के दौरान राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किया जा सके.
पहली बार हाईवे पर रडार सिस्टम
बिहार पुलिस पहली बार मल्टी-लेन हाईवे पर रडार आधारित स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने जा रही है. इसके जरिए तेज रफ्तार वाहनों की पहचान की जाएगी और वाहन चालकों को तुरंत एसएमएस के माध्यम से ई-चालान भेजा जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की तर्ज पर बिहार में भी समर्पित हाईवे पेट्रोलिंग यूनिट बनाने का प्रस्ताव राज्य गृह विभाग को भेजा जाएगा. पुलिस उप महानिरीक्षक (यातायात) SK Saroj के अनुसार बिहार में सड़क हादसों में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार पूरे देश में 2025 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर 57,000 दुर्घटनाओं में लोगों की जान गई ,जबकि इस दौरान बिहार में 12,669 मौतें दर्ज की गई.
- 2020: 6,699 मौतें
- 2021: 9,553 मौतें
- 2022: 10,801 मौतें
- 2023: 11,014 मौतें
- 2024: 11,610 मौतें
- 2025: 12,669 मौतें
सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी चिंता
दरअसल, Supreme Court of India ने हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ती दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई थी. जस्टिस JK Maheshwari और जस्टिस Atul S Chandurkar की पीठ ने इसे प्रणालीगत लापरवाही और भयावह बुनियादी ढांचा विफलता करार दिया था. तेलंगाना के Ranga Reddy जिले में सड़क दुर्घटनाओं में 34 लोगों की मौत के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार सुरक्षित सड़क वातावरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी राज्य पर डालता है.
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को कई अहम निर्देश दिए हैं. कोर्ट के निर्देश के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा टास्क फोर्स का गठन, हर जिले में जिला हाईवे सुरक्षा कार्यबल बनाना, हाईवे पर भारी वाहनों की पार्किंग और रुकने पर रोक, राजमार्ग के राइट ऑफ वे (ROW) में नए ढाबों और भोजनालयों पर प्रतिबंध और दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट की पहचान और सूची प्रकाशित करने कहा गया है. अदालत ने यह भी कहा कि एनएचएआई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय 45 दिनों के भीतर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की विस्तृत सूची जारी करें. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो बिहार में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की बढ़ती संख्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है.