Prashant Kishor : प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में एक नया प्रतीकात्मक संदेश देते हुए अपना ठिकाना पटना के वीआईपी इलाके से हटाकर IIT पटना के पास अमहारा गांव के निकट बने जन बिहार नव निर्माण आश्रम में स्थानांतरित कर लिया है. मिट्टी और फूस से बना यह परिसर को अब जनसुराज का नया राजनीतिक और संगठनात्मक केंद्र होगा. दरभंगा में बुधवार को आयोजित पार्टी बैठक में किशोर ने घोषणा की कि वह 19 मई की रात से इसी आश्रम में रह रहे हैं और आगामी विधानसभा चुनाव तक यहीं से पार्टी की गतिविधियों का संचालन करेंगे. उन्होंने कहा कि जन सुराज पार्टी जब तक बिहार में बदलाव नहीं लाती, तब तक मैं इसी आश्रम में रहूंगा.
राजनीतिक संदेश देने की कोशिश
बता दें कि अब तक जनसुराज का संचालन पटना स्थित पूर्व सांसद उदय सिंह और एन के सिंह के आवास से हो रहा था. ऐसे में जानकारों का मानना है कि नए आश्रम में शिफ्ट होना केवल पता बदलना नहीं, बल्कि खुद को जनता के बीच स्थापित करने की रणनीति है. नया परिसर किसी आधुनिक राजनीतिक कार्यालय से अधिक ग्रामीण आश्रम जैसा दिखता है. जिसको लेकर यह भी चर्चा है कि मिट्टी और फूस से बने ढांचे, अस्थायी झोपड़ियां और खुले परिसर के जरिए किशोर खुद को आम लोगों और ग्रामीण बिहार के करीब दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब किशोर ने यह रणनीति अपनाई है, इससे पहले किशोर ने गंगा किनारे अस्थायी ढांचे से पार्टी संचालन की कोशिश की थी, लेकिन वह प्रयोग अधिक समय तक नहीं चल पाया.
चुनावी निराशा के बाद नई शुरुआत
बिहार की राजनीति में खुद को स्थापित करने और सत्ता की महत्वाकांक्षा रखने वाले प्रशांत किशोर ने अपनी राणनीतिक पारी को विराम देते हुए राजनीतिक पारी की शुरुआत की और प्रयास किया लेकिन जनता के नजर में उनका प्रयास नकाफी रहा. 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज को मात्र 3.44 प्रतिशत वोट मिले थे और पार्टी कोई बड़ा राजनीतिक प्रभाव नहीं छोड़ सकी. अब किशोर इसे नई शुरुआत के रूप में पेश कर रहे हैं. दरभंगा बैठक में उन्होंने कहा कि हमने पहले नई सरकार को छह महीने का समय देने का फैसला किया था, लेकिन अब हमने फिर से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है क्योंकि सरकार का सिर्फ चेहरा बदला है, बिहार की समस्याएं नहीं.
सम्राट चौधरी सरकार पर हमला
किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा. मुख्यमंत्री आवास के विस्तार कार्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार से पलायन जारी है, लेकिन सरकार जनता की समस्याओं के बजाय सत्ता के ढांचे को बड़ा करने में लगी है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब बिहार के लोग रोजगार के लिए बाहर जा रहे हैं, तब मुख्यमंत्री को 25 एकड़ जमीन भी कम पड़ रही है. जिस पैसे से सरकारी कर्मचारियों की पेंशन दी जा सकती थी, वह रखरखाव पर खर्च हो रहा है. महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के सरकारी वादे पर भी किशोर ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जनसुराज जल्द ही महिलाओं को 2 लाख रुपये देने के वादे को लागू कराने के लिए अभियान चलाएगी. बिना नाम लिए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार पर भी कटाक्ष किया. किशोर ने कहा कि जिन लोगों ने बड़े वादे किए,उन्होंने अपने बच्चों को आगे बढ़ाया और बिहार के युवाओं को मजदूरी के लिए छोड़ दिया.
क्या आश्रम मॉडल से बदलेगी राजनीति?
जनसुराज को हाल के महीनों में कई संगठनात्मक झटके भी लगे हैं. भोजपुरी गायक और नेता रितेश पांडे विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी छोड़ चुके हैं. वहीं पूर्व IPS अधिकारी आनंद मिश्रा अब भाजपा से बक्सर के विधायक हैं. हाल ही में जनसुराज के वरिष्ठ नेता Y V Giri की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात ने भी राजनीतिक अटकलों को हवा दी है. हालांकि गिरी ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन इसे पार्टी के अंदर असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है. प्रशांत किशोर का नया आश्रम मॉडल बिहार की राजनीति में एक अलग प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल यह है कि क्या यह प्रतीकात्मक राजनीति जन समर्थन में बदल पाएगी, या फिर यह केवल एक नया राजनीतिक मंच बनकर रह जाएगा. फिलहाल जनसुराज अपने कमजोर चुनावी प्रदर्शन के बाद जमीन पर दोबारा पकड़ बनाने की कोशिश में जुटी है.