Ayodhya में बीजेपी के हार के क्या हैं मायने, राम मंदिर निर्माण के बाद भी क्यों पिछड़ गई भगवा पार्टी

दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाती हैं, राजनीतिक मायनों में इस कथन के अपनी महत्ता हैं। कथन के मायने क्या हैं लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों में साफ साफ झलकता है। आम चुनाव 2024 में 2014 और 2019 के प्रचंड जीत से उत्साहित बीजेपी के गले में उत्तर प्रदेश अटक गया। राज्य की कुल 80 सीटों में पार्टी को सिर्फ 33 सीटें मिली। पूरे प्रदेश में न सिर्फ पार्टी के सीटों में कमी आई बल्कि वोट शेयर भी घट गया। लोकसभा चुनाव 2019 में मिली 62 सीटों इस बार सेंध लग गया। जिससे पार्टी को राज्य में 29 सीटों का नुकसान हुआ हैं। लेकिन इन 29 सीटों में सुर्खियां बटोर रही हैं उत्तर प्रदेश का Ayodhya।

Ayodhya सीट चर्चा में क्यों

यह सीट चर्चा में क्यों है? बीजेपी को इस सीट पर सफलता क्यों नहीं मिली ? आखिर वो कौन सी वजह थी जिसने प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के बावजूद भी बीजेपी को इस सीट से सफलता नहीं दिला पाई। लोकसभा के लिए उत्तर प्रदेश के 80 सीटों में से एक है फैजाबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र। जहां से बीजेपी ने एक बाद फिर से लगातार दो बार से मौजूदा सांसद लल्लू सिंह को टिकट दिया।

अवधेश प्रसाद 54,567 वोटों से जीते

राजनीतिक गलियारों में उनकी जीत महज औपचारिक जीत मानी जा रही थी। लेकिन लोकतंत्र में परिणाम अटकलों और चर्चे से कहां निर्धारित होते हैं ? जनता जिसके नाम का बटन दबाती हैं जीत उसी की सुनिश्चित होती है और उत्तर प्रदेश के इस सीट पर लल्लू सिंह के पक्ष में सिर्फ 4,99,722 बार बटन दबाए गए जो जीत के लिए पर्याप्त नहीं था। यूपी के इस सीट से समाजवादी पार्टी ने अवधेश प्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाया था जिनके पक्ष में कुल 5,54,289 बार EVM की ललबत्ती जली। संसद के निचली सदन में बैठने के लिए यह काफी था और अवधेश प्रसाद 54,567 वोटों से जीत गए।

Ayodhya में लगभग 84 फीसदी हिन्दू आबादी

फैजाबाद सीट के अंतर्गत ही, Ayodhya नगरी आती है। जहां नवनिर्मित मंदिर के मुद्दे को बीजेपी ने पूरे देश भर में वोट कमाए। राम मंदिर के साथ साथ इस बार जीत के लिए तमाम विकास प्रोजेक्ट का तोहफा भी दिया लेकिन इन मुद्दों पर बीजेपी आम जनता का भरोसा नहीं जीत पाई। लगभग 84 फीसदी हिन्दू आबादी वाले इस सामान्य सीट से अखिलेश यादव ने नया प्रयोग किया और सामान्य सीट होने के बावजूद अयोध्या की सबसे बड़ी दलित आबादी वाली पासी बिरादरी से आने वाले अवधेश प्रसाद को उम्मीदवार बनाया।

यह रहा कारण

संख्या के लिहाज से Ayodhya की सबसे बड़ी जाति पासी बिरादरी है। इस अलावा दलित उम्मीदवार के पीछे न सिर्फ दलित जातियां बल्कि कुर्मी जैसी ओबीसी जातियां भी गोलबंद हो गईं जिसका पूरा फायदा अवधेश प्रसाद को मिला। इस सीट से बीजेपी के हार के पीछे लल्लू सिंह का संविधान बदलने वाली बयान और अखिलेश यादव द्वारा जातीय समीकरण को लेकर तैयार चक्रव्यूह को ना भेद पाना बड़ा कारण रहा।

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