पटना। (Bihar Politics) बिहार की राजनीति में राज्यसभा सांसदों (Rajya Sabha MP) के नए समीकरण ने एक बार फिर ध्यान खींचा है। हाल ही में, बीजेपी ने बिहार से राज्यसभा के लिए मनन कुमार मिश्रा को अपना उम्मीदवार बनाया है। मनन कुमार मिश्रा, जो गोपालगंज जिले से आते हैं और एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण चेहरा हैं, राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनकी नियुक्ति के साथ, बिहार से राज्यसभा में बीजेपी के कुल पांच सांसद हो जाएंगे।
Rajya Sabha MP : बीजेपी के सांसद
- सतीश चंद्र दुबे (ब्राह्मण)- वाल्मिकीनगर से
- धर्मशिला गुप्ता (वैश्य)- दरभंगा से
- भीम सिंह (कहार) – गया से
- शंभू शरण पटेल (कुर्मी) – शेखपुरा से
- मनन कुमार मिश्रा (ब्राह्मण) – गोपालगंज से
मनन कुमार मिश्रा के शामिल होने के बाद, बीजेपी के पास राज्यसभा में बिहार से दो ब्राह्मण चेहरे हो गए हैं। इससे पार्टी के ब्राह्मण वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास स्पष्ट है।
Rajya Sabha MP : जेडीयू के सांसद
जेडीयू की ओर से भी राज्यसभा के सांसदों का एक विविधतापूर्ण समूह है। वर्तमान में जेडीयू के चार राज्यसभा सांसद हैं
- संजय झा (ब्राह्मण) – मधुबनी से
- हरिवंश (राजपूत) – यूपी से
- खीरू महतो (कुर्मी) – झारखंड से
- रामनाथ ठाकुर (नाई) – समस्तीपुर से
अब इस समीकरण में एक और नया नाम जुड़ रहा है। रालोसपा (रालोसपा के पुनर्गठित रूप, रालोसपा-मोर्चा) के नेता **उपेंद्र कुशवाहा** को जेडीयू ने वैशाली से राज्यसभा के लिए चुना है। उपेंद्र कुशवाहा, जो कोइरी समुदाय से आते हैं, इस प्रकार बिहार से राज्यसभा में जेडीयू के पाँचवें सांसद होंगे।
जातिवाद को मिल रही प्राथमिकता
बिहार में जातिगत संतुलन हमेशा से ही राजनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। बीजेपी और जेडीयू दोनों ने राज्यसभा में अपने उम्मीदवारों के चयन में इस संतुलन का विशेष ध्यान रखा है। बीजेपी ने ब्राह्मण, वैश्य, कहार, और कुर्मी समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए एक समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है। वहीं, जेडीयू ने भी ब्राह्मण, राजपूत, कुर्मी, और नाई समुदायों के साथ-साथ अब कोइरी समुदाय को भी शामिल कर अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत किया है।
Rajya Sabha MP : राज्यसभा में बिहार से कुल 10 सांसद
राज्यसभा में बिहार से कुल 10 सांसद होंगे, जिनमें बीजेपी के पांच और जेडीयू के पांच सांसद शामिल होंगे। इन नियुक्तियों के माध्यम से दोनों दलों ने बिहार में अपने जातिगत आधार को मजबूत करने का प्रयास किया है, जो आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।