धर्म। इस वर्ष का Janmashtami विशेष महत्व रखती है, क्योंकि माना जाता है कि इस बार की जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के 5251वें जन्मोत्सव है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व भारत के साथ साथ विदेशों में भी भक्ति और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ मनाया जाता है।
कब है Krishna Janmashtami
इस साल, जन्माष्टमी सोमवार, 26 अगस्त को पड़ेगी। Janmashtami की मुख्य पूजा 26 अगस्त के आधी रात को होगी। इस सबसे शुभ समय माना जाता है।
उत्सव और रीति-रिवाज
वैसे तो देश भर में यह उत्सव मनाया जाता है लेकिन मथुरा और वृंदावन जैसे स्थानों में भगवान श्रीकृष्ण का इतिहास और परंपरा गहराई से जुड़ी हुई है, इसलिए यंहा उत्सव विशेष रूप से भव्य होते हैं। इस दिन भक्तगण व्रत रखते हैं, भक्ति गीत गाते हैं, और श्रीकृष्ण के जीवन की लीला का नाट्य रूपांतरण करते हैं, जिसे रास लीला के नाम से जाना जाता है।
कैसे मनाई जाती है Janmashtami
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जन्माष्टमी को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। गुजरात में गरबा जैसे लोक नृत्यों के साथ उत्सव मनाया जाता है, जबकि तमिलनाडु में घरों को भगवान कृष्ण के पैरों के निशान से सजाया जाता है, जो उनके दिव्य आगमन का प्रतीक होता है।तो इस अवसर पर महाराष्ट्र में प्रसिद्ध दही हांडी कार्यक्रम भी एक प्रमुख आकर्षण है, जिसमें टीमें दही के मटके को तोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाती हैं।
क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी
इस साल की Janmashtami खास है, क्योंकि प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग से भक्तगण दुनिया भर में मंदिरों की पूजा और कार्यक्रमों में वर्चुअल रूप से भाग ले सकते हैं, जिससे परंपरा और आधुनिकता का मेल हो रहा है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं, विशेष रूप से धर्म और भक्ति के सिद्धांतों पर चिंतन करने का समय है, जो आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। जो लोग इन रीति-रिवाजों में शामिल होना चाहते हैं, वे 26 अगस्त को व्रत और पूजा शुरू कर सकते हैं, और 27 अगस्त की सुबह आधी रात के बाद व्रत खोल सकते हैं।