राहुल गांधी के अमेरिका में दिए बयान पर विवाद: जीतनराम मांझी ने की आलोचना, मायावती ने सफाई को बताया गुमराह की कोशिश

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अमेरिका में आरक्षण और भारतीय संविधान पर दिए बयान को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अपने बयान पर सफाई देने के बावजूद, राहुल गांधी की आलोचना थमने का नाम नहीं ले रही है। अब केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने भी राहुल गांधी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

जीतनराम मांझी ने बयान पर दी प्रतिक्रिया

जीतनराम मांझी ने कहा कि किसी भी देशभक्त को विदेशी धरती पर जाकर अपनी देश की चुनी हुई सरकार पर अभद्र टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को “देशद्रोही” करार देते हुए कहा, “राहुल गांधी का यह बयान पूरी तरह गलत है। नरेंद्र मोदी के रहते किसी राहुल गांधी की हैसियत नहीं है कि वह देश से आरक्षण खत्म कर सके।”

राहुल गांधी ने दी बयान पर सफाई

राहुल गांधी ने इस विवाद पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा, “मैंने कभी भी आरक्षण के खिलाफ बात नहीं की है। मेरा बयान गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मैं आरक्षण के खिलाफ नहीं हूं। कांग्रेस आरक्षण को 50 प्रतिशत से बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है और कभी भी इसके खिलाफ नहीं रही।”

बयान पर मायावती का दावा

राहुल गांधी की सफाई पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का बयान “गुमराह करने वाला” है। मायावती ने आरोप लगाया कि बीजेपी के शासन के पहले कांग्रेस ने 10 वर्षों तक सत्ता में रहते हुए SC/ST और OBC के पदोन्नति आरक्षण बिल को पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी और कांग्रेस की नीयत साफ होती तो इस मुद्दे पर पहले ही कदम उठाए गए होते।

अमेरिका में राहुल ने क्या कहा ?

राहुल गांधी ने अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि कांग्रेस तब आरक्षण समाप्त करने के बारे में सोचेगी जब देश में निष्पक्षता स्थापित होगी। उन्होंने कहा, “फिलहाल देश में ऐसी स्थिति नहीं है कि आरक्षण को खत्म किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय आंकड़े दर्शाते हैं कि आदिवासियों, दलितों और ओबीसी को उचित हिस्सेदारी नहीं मिल रही है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि देश के शीर्ष बिजनेस लीडरों की सूची में आदिवासी, दलित या ओबीसी के प्रतिनिधि क्यों नहीं हैं।

(क्रेडिट -मीडिया इनपुट)

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