नई दिल्ली। बिहार और पूर्वांचल के प्रमुख त्योहारों में से एक, Chhath Puja का महत्व अब न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बढ़ता जा रहा है. विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, और देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में बसे प्रवासी भी श्रद्धापूर्वक छठ पूजा मनाते हैं. यह त्योहार सूर्य देवता की उपासना और उनकी कृपा पाने के लिए समर्पित है, जिसमें लाखों लोग व्रत और सूर्य को अर्घ्य देने के लिए एकत्रित होते हैं.
इस वर्ष छठ पूजा 5 नवंबर 2024 से प्रारंभ होगी। जानिए हर दिन का विशेष महत्व और पूरी तिथियों की जानकारी.
कब है Chhath Puja
- नहाय खाय (5 नवंबर 2024, मंगलवार)
छठ पूजा के पहले दिन को नहाय खाय कहा जाता है. इस दिन व्रती (व्रत रखने वाले श्रद्धालु) नदी, तालाब, या किसी जलाशय में स्नान करते हैं और सात्विक भोजन का सेवन करते हैं. खास बात यह है कि इस दिन का भोजन बिना लहसुन-प्याज का होता है. इसे ग्रहण कर व्रती छठ पूजा के चार दिवसीय व्रत की तैयारी करते हैं.
- खरना (6 नवंबर 2024, बुधवार)
Chhath Puja का दूसरा दिन खरना कहलाता है. इस दिन व्रती निर्जला उपवास करते हैं, यानी पूरे दिन बिना पानी पिए रहते हैं. शाम को व्रती गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद तैयार करते हैं, जिसे भगवान को अर्पण करने के बाद खुद ग्रहण करते हैं. इसके साथ ही फल का भोग भी चढ़ाया जाता है. इस दिन का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती अगले दिन के अर्घ्य के लिए तैयार होते हैं.
- संध्या अर्घ्य (7 नवंबर 2024, गुरुवार)
तीसरा दिन Chhath Puja का मुख्य दिन होता है, जिसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है. इस दिन व्रती सूर्यास्त के समय नदी, तालाब, या किसी जल स्रोत के किनारे एकत्रित होते हैं और सूर्य भगवान को जल अर्पण करते हैं. संध्या अर्घ्य छठ पूजा का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है, जिसमें पूरे भक्ति भाव से व्रती सूर्य देवता की आराधना करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
- उषा अर्घ्य और पारण (8 नवंबर 2024, शुक्रवार)
चौथे दिन, यानी अंतिम दिन को उषा अर्घ्य के नाम से जाना जाता है. इस दिन व्रती उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं, जिसके बाद पूजा का समापन होता है. सुबह के इस अर्घ्य के बाद व्रती अपना व्रत खोलते हैं, जिसे पारण कहते हैं. पारण के बाद छठ पूजा का प्रसाद सभी में बांटा जाता है और श्रद्धालु सूर्य देवता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
Chhath Puja का महत्व और पारंपरिक तरीके
छठ पूजा का उद्देश्य सूर्य देवता से आशीर्वाद प्राप्त करना और सुख-समृद्धि की कामना करना है. इसे निस्वार्थ, बिना किसी मूर्ति के, सीधे प्राकृतिक रूप में सूर्य की उपासना के रूप में किया जाता है. श्रद्धालु नदी या तालाब के किनारे एकत्रित होते हैं और व्रत रखते हैं. यह व्रत कठिन होता है क्योंकि इसमें कई नियमों का पालन किया जाता है, जिसमें उपवास, साफ-सफाई, और पूजन विधियों का खास ख्याल रखा जाता है.
बिहार और पूर्वांचल के साथ-साथ देशभर में और अब दुनिया के कई हिस्सों में भी इस पूजा का आयोजन किया जाता है. दिल्ली, मुंबई, और कोलकाता जैसे महानगरों में, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी रहते हैं, वहां भी छठ पूजा बड़े स्तर पर मनाई जाती है. विदेशी शहरों में, खासकर न्यूयॉर्क, लंदन, और दुबई जैसे स्थानों में बसे प्रवासी इस पर्व को धूमधाम से मना रहे हैं, जो इस त्योहार के वैश्विक विस्तार का परिचायक है.