यौन स्वास्थ्य उत्पादों की यह उपलब्धता भारत में बदलते सांस्कृतिक और सामाजिक परिवेश की गवाही देती है. जो पहले फुसफुसाहट में चर्चा का विषय था, वह अब खुलेआम उपलब्ध है. IMBesharam, My Muse, और Leezu’s जैसे ब्रांड इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं और यौन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान कर रहे हैं.
अरब डॉलर का बाजार
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि 2024 में भारत का यौन स्वास्थ्य उद्योग $1 बिलियन तक पहुंच गया है और Allied Market Research के अनुसार, यह दोगुना होने की उम्मीद है. वैश्विक स्तर पर भी यह बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जो $44 बिलियन से $80 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है. लीज़ू की संस्थापक और यौन स्वास्थ्य शिक्षिका लीज़ा मंगलदास का मानना है कि भारत में 2030 तक एक अरब लोगों का कार्यबल होगा, जिनमें से अधिकांश 21–40 आयु वर्ग में होंगे. यदि हम 80% आबादी को क्रय शक्ति और उम्र के आधार पर छोड़ भी दें, तब भी हमारे पास 200 मिलियन संभावित ग्राहक होंगे.
sexual health को लेकर बदलती सामाजिक सोच
IMBesharam के सह-संस्थापक राज अरमानी का कहना है कि सबसे बड़ा बदलाव यौन स्वास्थ्य ( sexual health ) पर खुली बातचीत के रूप में उभरकर आया है. जब माता-पिता अब अपने बच्चों से इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं. जोड़े शादी से पहले और बाद में इस पर खुलकर बात कर रहे हैं. शिक्षक, छात्र, डॉक्टर और कोच इस बातचीत का हिस्सा बन रहे हैं. यौन स्वास्थ्य उत्पादों की मांग अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रही. My Muse ने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी ऐसे प्रोडक्ट भारी मात्रा में ऑर्डर आ रहे हैं. अरमानी ने कहा कि 18–25 आयु वर्ग चर्चा को आगे बढ़ा रहा है, जबकि 25–40 आयु वर्ग खरीदारी के लिए अग्रणी है .
महिलाओं के लिए चुनौती लेकिन भविष्य की राह आसान
हालांकि पुरुष इन उत्पादों की खरीदारी में अधिक सहज हैं, महिलाओं को अब भी कलंक का सामना करना पड़ता है. महिलाओं के लिए अपने आनंद को प्राथमिकता देना जीवन बदलने वाला हो सकता है.आने वाले दशक में इस उद्योग में नई तकनीकों के जुड़ने की उम्मीद है. AR और VR जैसे इंटरैक्टिव उत्पाद यौन स्वास्थ्य में नई संभावनाएं ला सकते हैं.
मंगलदास ने कहा कि मेरा सपना है कि सेक्स टॉयज़ और लुब्रिकेंट्स टूथब्रश और फेस वॉश जितने सामान्य हो जाएं. यौन स्वास्थ्य अब केवल उत्पाद बेचने का साधन नहीं रह गया है. यह एक सांस्कृतिक बदलाव का माध्यम बन गया है. जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ रही है, भारत एक अधिक समावेशी, सूचित और कलंक-मुक्त यौन स्वास्थ्य परिदृश्य की ओर बढ़ रहा है.
इनपुट- The Indian Express