नई दिल्ली। गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दो विधेयकों को संसद के मौजूदा सत्र में पेश करने की मंजूरी दी है. इनमें से एक विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल को एक साथ लाने ( ‘One Nation, One Election’ ) के लिए और दूसरा दिल्ली व अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में समान संशोधन के लिए है. मीडिया सूत्रों के अनुसार, इन विधेयकों को संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है. मौजूदा सत्र 20 दिसंबर को समाप्त होगा.विधेयकों के आगे की समीक्षा के लिए संसदीय समिति ( JPC) को भेजा जा सकता है.
बता दें कि 1967 और 1971 के बीच अस्थिर गैर-कांग्रेसी सरकारों के गिरने और इंदिरा गांधी द्वारा लोकसभा चुनाव 1972 को 1971 में कराने के फैसले के बाद देश में एक साथ चुनाव कराने की योजना बाधित हो गई थी. लेकिन इस योजना को अमल में लाने के लिए एक रोडमैप की आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अगर कोई सरकार बहुमत खो दे तो क्या किया जाएगा.
One Nation One Election : कोविंद समिति की सिफारिशें
2023 में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा गठित राम नाथ कोविंद समिति ने एक साथ चुनाव कराने (‘One Nation, One Election’) के लिए संभावित रोडमैप का सुझाव दिया. अपनी रिपोर्ट में समिति ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव को पहले चरण के रूप में सुझाया, इसके बाद 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की बात कही. कोविंद समिति के समक्ष अपनी राय देने वाले 47 दलों में से 32 ने इस विचार का समर्थन किया, जबकि 15 दलों ने इसका विरोध किया.
यह प्रक्रिया (‘One Nation, One Election’) संविधान में संशोधन की मांग करती है. पहले चरण में, यदि संसद एक साथ चुनाव को मंजूरी देती है, तो राज्यों से इस पर अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी. हालांकि, दूसरे चरण में, नगरपालिका और पंचायत चुनावों को लोकसभा और विधानसभा चुनावों के साथ समन्वयित करने के लिए आधे से अधिक राज्यों की स्वीकृति की आवश्यकता होगी.
संविधान संशोधन की आवश्यकता
समिति ने अनुच्छेद 83 (लोकसभा के कार्यकाल) और अनुच्छेद 172 (राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल) में संशोधन का सुझाव दिया है. इन संशोधनों के बाद राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी की जाएगी. यदि संशोधन संसद से पारित नहीं होते, तो अधिसूचना निरस्त हो जाएगी.
यदि यह प्रक्रिया 2029 तक लागू होती है, और लोकसभा या किसी राज्य विधानसभा का कार्यकाल बहुमत खोने के कारण समाप्त हो जाता है, तो समिति ने “मध्यावधि चुनाव” कराने और नई सरकार को केवल शेष कार्यकाल के लिए काम करने का प्रस्ताव दिया है.
क्या कुछ सरकारों का कार्यकाल छोटा होगा?
यदि एक साथ चुनाव 2029 में शुरू होते हैं, तो कई राज्य विधानसभाओं को उनके पांच साल के कार्यकाल से पहले भंग करना होगा. 2028 में चुनाव होने वाले हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों की नई सरकारें केवल एक वर्ष तक ही सत्ता में रहेंगी.