पटना। देशभर में ठंड का कहर जारी है, लेकिन बिहार और दिल्ली में सियासी माहौल में गर्मी बनी हुई है. जहां दिल्ली में 5 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है, वहीं बिहार में साल के अंत तक नई सरकार की तस्वीर साफ हो जाएगी. ऐसे में दोनों राज्यों में INDIA गठबंधन को लेकर सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है.
क्या INDIA गठबंधन टूट रहा है?
दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच दूरी और सहयोगी दलों की असहमति के चलते यह सवाल उठ रहा है कि क्या विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन बिखरने की कगार पर है. हालांकि, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इन अटकलों को खारिज किया है. आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा, INDIA गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर बना है और यह आगे भी काम करेगा. तेजस्वी यादव (tejashwi yadav) ने गठबंधन के संदर्भ में जो बयान दिया था, वह केवल दिल्ली के लिए था, बिहार के लिए नहीं. एनडीए इसे गलत तरीके से पेश कर रहा है.
दिल्ली में गठबंधन पर संशय
दिल्ली में आरजेडी के गठबंधन को लेकर शक्ति यादव ने कहा कि अभी यह तय नहीं है कि आरजेडी दिल्ली चुनाव लड़ेगी या नहीं. उन्होंने कहा कि हमारी स्थिति पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, इसलिए यह कहना गलत होगा कि हम किसी विशेष दल के साथ हैं या नहीं. कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण और संजय राउत द्वारा ‘आप’ और कांग्रेस के बीच गठबंधन की वकालत पर शक्ति यादव ने कहा कि यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं.
बिहार में सीटों को लेकर बयानबाजी
बिहार में कांग्रेस की 70 से ज्यादा सीटें और दो डिप्टी सीएम पद की मांग पर शक्ति यादव ने कहा कि इस पर आरजेडी और कांग्रेस आलाकमान के बीच बातचीत होगी. उन्होंने कहा बयानबाजी से कोई फर्क नहीं पड़ता यह मुद्दा बातचीत से सुलझेगा.
राज्यों के चुनाव में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अलग
आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि राज्यों के चुनाव में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अलग होती है. इसका यह मतलब नहीं है कि गठबंधन टूट गया है.उन्होंने एनडीए पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी अपने सहयोगियों को खत्म कर देती है, लेकिन इंडिया गठबंधन में ऐसा नहीं होता. शक्ति यादव ने बिहार में गठबंधन को मजबूत बताते हुए कहा कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और हम मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे.
क्या होगी INDIA गठबंधन की राह?
बिहार और दिल्ली में INDIA गठबंधन की दिशा और सहयोगी दलों के बीच सीटों को लेकर सहमति कैसे बनती है, यह देखना दिलचस्प होगा. जहां एक ओर बीजेपी इस स्थिति को भुनाने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्षी दल अपने अंदरुनी मतभेदों को सुलझाने में जुटे हैं. सियासी तापमान में इस उछाल ने चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना दिया है.