संगम नोज के अलावा झूंसी में भी हुई थी भगदड़ ? प्रशासन की चुप्पी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल…

पटना। महाकुंभ 2025 (Mahakumbh Updates) में बुधवार को महान स्नान पर्व मौनी अमावस्या के दौरान भारी भीड़ उमड़ी. इस पवित्र आयोजन के बीच दो भगदड़ों की घटनाओं ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पहली भगदड़ संगम नोज़ के पास रात करिब 1:30 बजे हुई, जबकि दूसरी भगदड़ झूंसी में सुबह 5:55 बजे हुई. भगदड़ में 30 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है.

लेकिन मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा कि दूसरी भगदड़ की खबर को दबा दिया गया ताकि महाकुंभ में मौजूद करोड़ों श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी न मचे. जिसको लेकर प्रशासन का कहना है कि वे लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे थे, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के बयान प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं.

पहली भगदड़: संगम नोज़ पर मची अफरा-तफरी

महाकुंभ (Mahakumbh Updates)में शाही स्नान के लिए उमड़ी 5.5 करोड़ की भीड़ बेकाबू हो गई और आधी रात को संगम नोज़ के पास भगदड़ मच गई. श्रद्धालुओं की भारी संख्या और अव्यवस्थित भीड़ नियंत्रण के चलते कई लोग दम घुटने और कुचलने से अपनी जान गंवा बैठे. एक प्रत्यक्षदर्शी ने इस घटना को लेकर बताया कि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लोग बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने लगे. कई श्रद्धालु जमीन पर सो रहे थे, जिससे रास्ते पूरी तरह बंद हो गए थे. अचानक भगदड़ मच गई, लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और कई लोगों की मौत हो गई.

दूसरी भगदड़ : झूंसी में तबाही, लेकिन सूचना छिपाई गई?

इंडिया टुडे डिजिटल की सहयोगी संस्था लल्लनटॉप ने अपने एक रिपोर्ट में दावा किया कि संगम नोज़ की भगदड़ के कुछ घंटों बाद ही दूसरी बड़ी भगदड़ झूंसी में हुई, जहां हजारों श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे थे. झूंसी गंगा के उत्तर तट पर स्थित है, संगम से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है. घटनास्थल पर जूते-चप्पलों कपड़ों और बोतलों के ढेर थे जिन्हें ट्रैक्टरों से हटाया जा रहा था.

Mahakumbh Updates : झूंसी भगदड़ पर चौंकाने वाले खुलासे

घटना (Mahakumbh Updates)को लेकर घटनास्थल के नजदिक ही हल्दीराम स्टॉल पर काम कर रही प्रत्यक्षदर्शी नेहा ओझा ने बताया कि भगदड़ के समय कोई कोई सुध लेने वाला नहीं था. उसने कहा कि जब झूंसी में भगदड़ हुई, तो वहां ना तो कोई रिपोर्टर मौजूद था और ना ही प्रशासन.ओझा ने दावा किया कि पुलिस वीडियो बनाने वालों को रोक रही थी और एक महिला पुलिस कांस्टेबल घटना के 4 घंटे बाद मौके पर पहुंची. ओझा ने यह भी कहा कि यहां लाशें पड़ी थीं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं था. दम घुटने से मरे लोगों के शव दोपहर 1:30 बजे तक हटाए गए. नेहा ओझा ने कहा कि भगदड़ के दौरान जब वो लोगों कि मदद कर रही थी उनके दुकान से ₹1,80,000 कैश काउंटर से लूट लिए गए. एक प्रत्यक्षदर्शी मेन बहादुर सिंह ने कहा कि झूंसी में भगदड़ के बाद कोई एंबुलेंस यहां तक नहीं पहुंच पाई. एंबुलेंस सेवा केवल गंगा के पार ही उपलब्ध थी.

Mahakumbh Updates : क्या थी भगदड़ की असली वजह?

भगदड़ के पीछे एक साजिश होने का दावा भी किया जा रहा है. झूंसी में मौजूद एक साधु ने दावा किया कि सुबह एक बस यहां रुकी, और उसमें से 15-20 युवक उतरे. उन्होंने जानबूझकर हंगामा किया बैरिकेड्स तोड़ दिए और धक्का-मुक्की शुरू कर दी. जैसे ही बैरिकेड गिरा, भीड़ बेकाबू हो गई और लोग एक-दूसरे को कुचलने लगे. यह कुंभ को बदनाम करने की साजिश है.

प्रशासन की चुप्पी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल

एक कर्मचारी ने बताया कि भगदड़ स्थल(Mahakumbh Updates) को साफ करने में 6 घंटे और कई ट्रैक्टर लगे. प्रशासन की इस देरी और अव्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. महाकुंभ में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कई सुरक्षा प्रबंध किए थे, लेकिन दो भगदड़ों की घटनाओं ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है.

घटनाओं की सूचना को दबाया गया जिससे भ्रम की स्थिति बनी. श्रद्धालुओं को समय पर मदद नहीं मिली, जिससे कई लोगों की जान चली गई. पुलिस की देरी और मीडिया कवरेज की कमी भी सवालों के घेरे में है. महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की जानमाल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. प्रशासन की ओर से झूंसी में भगदड़ को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया.

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