पटना। बिहार में आगामी 2025 के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वामदल) दोनों अपने-अपने गठजोड़ को मजबूत करने में जुट गए हैं. हाल के आंकड़ों के अनुसार, NDA का वोट शेयर 2024 के 47% से बढ़कर 52% तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन का वोट शेयर 39% से बढ़कर 42% तक जा सकता है. हालांकि, जब इसे 2025 के विधानसभा चुनाव के संदर्भ में देखा जाए, तो नतीजे अलग हो सकते हैं.
NDA के लिए एकजुटता आवश्यक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि NDA के घटक दल—भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल (यूनाइटेड) (JDU), और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP)—एकजुट रहते हैं, तो उन्हें हराना मुश्किल होगा. NDA के नेताओं का दावा है कि वे आगामी चुनाव में 225 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएंगे. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA ने अपनी चुनावी रणनीति तेज कर दी है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने भी पुष्टि की है कि आगामी चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA चुनावी मैदान में उतरेगा.
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी NDA की जीत को लेकर आत्मविश्वास जताया है. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि NDA की एकजुटता के सामने विपक्ष दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में पिछले 19 वर्षों में बिहार में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया और जनता को इन उपलब्धियों से अवगत कराने की आवश्यकता बताई.
Bihar Assembly Elections: महागठबंधन में असंतोष के बादल
दूसरी ओर, महागठबंधन की ओर से राजद नेता तेजस्वी यादव ने विश्वास जताया है कि 2025 में महागठबंधन की सरकार बनेगी. हालांकि, सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन में तनाव देखा जा रहा है. कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की है, जबकि वामदलों ने 80 सीटों पर दावा ठोका है. इससे राजद के हिस्से में कम सीटें आने की संभावना है, जिससे गठबंधन में असंतोष बढ़ सकता है.
यदि लोकसभा चुनावों के दौरान NDA में कोई टूट होती है और महागठबंधन 2020 जैसी स्थिति में आता है, तो राजद गठबंधन के लिए सरकार बनाने की संभावनाएँ प्रबल हो सकती हैं. हालांकि, वर्तमान में NDA एकजुट नजर आ रहा है, जबकि महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर मतभेद उभर रहे हैं.
बिहार की राजनीति पर दिल्ली विधानसभा चुनावों का असर
हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत ने बिहार की राजनीति पर भी प्रभाव डाला है. इस जीत से भाजपा के नेता उत्साहित हैं और बिहार में समय से पहले चुनाव कराने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है. भाजपा की दिल्ली में सफलता के बाद, बिहार में सत्तारूढ़ NDA के घटक दलों के बीच एकजुटता की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है. यदि NDA एकजुट होकर चुनाव नहीं लड़ता है, तो राजद के तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं.
तेजस्वी यादव की चुनावी रणनीति
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं. उन्होंने महागठबंधन की सरकार बनने पर जनता के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है, जिनमें शामिल हैं:
- माई-बहिन सम्मान योजना
- 200 यूनिट मुफ्त बिजली
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि में वृद्धि
हालांकि, महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. यदि यह गठबंधन समय पर अपनी रणनीति को स्पष्ट नहीं कर पाया, तो NDA को लाभ मिल सकता है.
NDA की जीत की राह में चुनौतियां
भले ही NDA ने 225 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है, लेकिन गठबंधन के भीतर समन्वय बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी. यदि JDU और BJP के बीच किसी भी मुद्दे पर मतभेद गहराते हैं या गठबंधन में टूट होती है, तो यह सीधे तौर पर महागठबंधन के पक्ष में जा सकता है.
Bihar Assembly Elections: किसका पलड़ा भारी
बिहार का राजनीतिक परिदृश्य आगामी चुनावों से पहले काफी सक्रिय है, जहां सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीतियों को मजबूत करने में जुटे हैं. NDA के लिए एकजुटता आवश्यक होगी, जबकि महागठबंधन को अपने मतभेदों को सुलझाना होगा. यदि NDA मजबूत और संगठित रह पाता है, तो उसकी सत्ता में वापसी संभव है, लेकिन यदि सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर महागठबंधन प्रभावी रणनीति बनाता है, तो बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है.