लेखक मानव कौल की कृति “टूटी हुई बिखरी हुई” एक ऐसी रचना है, जिसका काल्पनिकता और वास्तविकता से कोई सीधा संबंध नहीं है. इस उपन्यास (Tooti Hui Bikhri Hui) के माध्यम से लेखक ने जीवन की टूटन, उम्मीदों के बिखराव और समाज की अधूरी सच्चाई को बेहद खूबसूरती से समेटा है. उपन्यास में नायक-नायिका के आदर्शों के पीछे समाज के उन कच्चे और अधूरे पहलुओं की कहानी छिपी है, जिन्हें आमतौर पर अनदेखा किया जाता है.
कौल ने इस उपन्यास की रचना में कल्पना और वास्तविकता के बीच के अंतर को एक निराकार रूप में प्रस्तुत किया है. यह उपन्यास अपनी वास्तविकता और रचनात्मकता के समन्वय में पाठकों को एक ठहराव और गहरी सोच में डुबोने की कोशिश करता है. लेखक ने इसे इस तरह से लिखा है कि हर पन्ना एक नई उम्मीद और टूटे हुए सपनों की कहानी को आगे बढ़ाता है, जिससे पाठक हर पन्ने को पलटने की विवशता महसूस करता है. यह पाठक के लिए एक जोखिम जैसा हो सकता है, लेकिन लेखक की लेखनी की यह विशेषता ही इसे असाधारण बनाती है.
“टूटी हुई बिखरी हुई” में नायिका का प्रधान होना समाज की पुरुष प्रधान सोच को चुनौती देने जैसा प्रतीत होता है. हालांकि, इसके पीछे लोकप्रियता की कोई चाहत नहीं बल्कि एक जरूरी समाजिक संदेश छुपा है. उपन्यास (Tooti Hui Bikhri Hui book review) में पुरुष की भूमिका को परिभाषित करते हुए लेखक ने उसकी सामाजिक स्थिति और तथाकथित पुरुषत्व की सीमाओं को दर्शाया है. इस कृति में पुरुष का चुनाव केवल उसकी जरूरत की पूर्ति के रूप में किया गया है, जो कि समाज में पुरुष के प्रभुत्व को तो दिखाता है, लेकिन उस शक्ति की असलियत को भी उजागर करता है.
लेखक ने इस उपन्यास (Tooti Hui Bikhri Hui) में कई बिखरे हुए और टूटे हुए किरदारों को गढ़ा है, जो समाज के उन हिस्सों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें हम सामान्यतः अनदेखा करते हैं. इन किरदारों की कहानियाँ समाज की वास्तविकता को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. समाज के इन हिस्सों को जानना और समझना गैरज़रूरी होते हुए भी काफ़ी जरूरी है.
यह उपन्यास हिंद युग्म द्वारा प्रकाशित किया गया है और इसकी गहराई से पाठकों को अपने समाज के उस पक्ष को जानने का अवसर मिलता है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. लेखक की यह कोशिश समाज की उन सच्चाइयों को उजागर करने की है जो आमतौर पर अनकही रहती हैं.
कुल मिलाकर, “टूटी हुई बिखरी हुई” एक बेहतरीन उपन्यास है जो अपने पात्रों और उनके दर्द के माध्यम से समाज की सचाइयों को उजागर करता है. यह उपन्यास पढ़ने लायक है क्योंकि यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हमारी समाजिक संरचना में क्या गलत है और क्या सही.