बिहार की सियासत में बाहुबलियों का दबदबा, विधानसभा चुनाव में किसकी होगी बाजी?

Bihar politics : बिहार की राजनीति में बाहुबलियों का प्रभाव हमेशा से रहा है. उनकी सक्रियता न केवल राज्य की सियासी गतिविधियों में बल्कि चुनावी नतीजों में भी अहम भूमिका निभाती है. इस बार 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले, बाहुबलियों और उनके परिवारों की सियासी चालों पर नजरें टिकी हैं. कुछ बाहुबलियों ने खुद को राजनीति में स्थापित कर लिया है, जबकि कुछ अपने परिजनों के जरिये सियासी वजूद बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. आइए, नजर डालते हैं बिहार के कुछ प्रमुख बाहुबलियों और उनके राजनीतिक भविष्य पर.

अनंत सिंह और उनका परिवार

मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव में जीत हासिल की थी. नीलम देवी ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर मोकामा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. दिलचस्प यह है कि जब नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू महागठबंधन से एनडीए में वापस लौट रही थी, तब नीलम देवी ने विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया था. अनंत सिंह, जो कभी नीतीश कुमार के करीबी थे, अब पूरी तरह से जेडीयू के साथ हैं. यह परिवार आगामी विधानसभा चुनाव में भी जेडीयू के पक्ष में दिखाई दे रहा है, और अनंत सिंह मोकामा सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश करेंगे.

सूरजभान सिंह और उनका परिवार

मोकामा से जुड़े एक और बाहुबली नेता सूरजभान सिंह ने वर्ष 2000 में निर्दलीय चुनाव जीता था और बिहार की सियासत में कदम रखा था. उन्होंने लालू यादव की सरकार में मंत्री रहे दिलीप सिंह को हराया था. सूरजभान 2004 में रामविलास पासवान की पार्टी एलजेपी के टिकट पर मुंगेर से सांसद बने. उनकी पत्नी वीणा देवी भी सांसद रह चुकी हैं. हालांकि, सूरजभान का परिवार अब चिराग पासवान की पार्टी के साथ है और एनडीए में शामिल है. सूरजभान ने इस बार के चुनाव में मोकामा से अनंत सिंह को हराने की घोषणा की है, जिससे मोकामा सीट पर एक और सियासी लड़ाई (Bihar politics)का माहौल तैयार हो गया है.

रामा सिंह का सियासी सफर

रामा सिंह, जो पहले लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) में थे, ने 2014 के आम चुनाव में वैशाली सीट से आरजेडी के दिग्गज नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को हराया था. 2020 में, रामा सिंह ने आरजेडी में शामिल होकर अपने सियासी कदम बढ़ाए थे, लेकिन अब वे फिर से चिराग पासवान की पार्टी में लौट आए हैं. यह बदलाव यह संकेत देता है कि रामा सिंह आगामी चुनावों में अपने राजनीतिक गठबंधन को लेकर स्पष्ट स्थिति में होंगे.

शहाबुद्दीन परिवार का सियासी भविष्य

सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन का परिवार भी बिहार की सियासत में एक महत्वपूर्ण नाम है. शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब ने तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हर बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद, उनके बेटे ओसामा ने तेजस्वी यादव की मौजूदगी में आरजेडी का दामन थाम लिया है. ओसामा के विधानसभा चुनाव में उतरने की चर्चा है, और इससे शहाबुद्दीन परिवार की सियासी वापसी की उम्मीदें बढ़ी हैं.

राजन तिवारी का सियासी नेटवर्क

राजन तिवारी का परिवार भी बिहार की राजनीति में सक्रिय है. राजन की मां कांति देवी ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं, जबकि उनके बड़े भाई राजू तिवारी भी राजनीति में हैं. राजू तिवारी, जो गोविंदगंज विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं, फिलहाल चिराग पासवान की अगुवाई वाली एलजेपी (आर) के प्रदेश अध्यक्ष हैं. राजन तिवारी और उनका परिवार आगामी चुनावों में अपनी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

Bihar politics ; सुनील पाण्डे और उनका परिवार

सुनील पाण्डे ने समता पार्टी के टिकट पर भोजपुर जिले की पीरो विधानसभा सीट से राजनीति की शुरुआत की थी. पिछले चुनाव में उन्हें तरारी सीट पर हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके बेटे विशाल प्रशांत ने बीजेपी से चुनाव जीतकर विधायक का पद हासिल किया. यह स्थिति सुनील पाण्डे और उनके परिवार की सियासी वापसी की संभावना को बल देती है.

आनंद मोहन और उनका परिवार

आनंद मोहन का नाम बिहार के प्रमुख बाहुबली नेताओं में शुमार है. उनकी पत्नी लवली आनंद जेडीयू से सांसद हैं, जबकि उनके बेटे चेतन आनंद भी राजनीति में सक्रिय हैं. चेतन ने 2020 में आरजेडी के टिकट पर विधायक के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर जीत हासिल की थी. आगामी चुनावों में यह परिवार भी सियासत में अपनी मौजूदगी को और मजबूती देने की कोशिश करेगा.

Bihar politics ; पप्पू यादव का कांग्रेस से गठबंधन

पप्पू यादव, जो पहले निर्दलीय विधायक और सांसद रहे थे, अब अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी (जाप) के कांग्रेस में विलय के बाद सियासी मैदान में नई भूमिका निभा रहे हैं. वे कांग्रेस के समर्थन से बिहार और अन्य राज्यों में पार्टी का प्रचार कर रहे हैं. उनकी पत्नी रंजीत रंजन भी कांग्रेस से राज्यसभा सांसद हैं, और यह परिवार आगामी चुनावों (Bihar politics)में कांग्रेस के साथ रहेगा.

प्रभुनाथ सिंह और उनका परिवार

आरजेडी के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर सिंह भी राजनीति में सक्रिय हैं. वे हाल ही में जेडीयू में शामिल हुए हैं और प्रदेश महासचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं. प्रभुनाथ सिंह के परिवार के सदस्य आगामी चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेंगे, जबकि उनकी पार्टी बदलने की राजनीति भी चर्चा का विषय है.

बिहार में बाहुबली नेताओं(Bihar politics) और उनके परिवारों की राजनीति राज्य की चुनावी गतिविधियों पर गहरी छाप छोड़ने वाली है. इन नेताओं के सियासी कदम यह तय करेंगे कि बिहार में किसका दबदबा कायम रहता है और कौन सी पार्टी किस सीट पर कब्जा जमाती है. चुनावी माहौल गर्म है और यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन से बाहुबली इस बार के चुनाव में विजयी होते हैं.

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