एक-दो नहीं बल्कि आने वाले दिनों में खत्म हो जाएगी 59 फीसदी नौकरी, लेकिन एक गुड न्युज भी है…

Future of Jobs report  : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और उभरती तकनीकी ने वैश्विक नौकरी बाजार की तस्वीर ही बदल दी है. एक ओर जहां इन तकनीकों के कारण पारंपरिक और कम-कुशल नौकरियों पर संकट गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नई संभावनाओं के भी कई द्वार खुल रहे हैं. खासकर भारत जैसे देशों के लिए, जिनके पास युवाओं की विशाल जनसंख्या है, यह तकनीकी क्रांति एक सुनहरा अवसर भी साबित हो सकती है.

Future of Jobs : 59% नौकरियां खतरे में

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले कुछ वर्षों में दुनियाभर में लगभग 59% नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है यदि लोग नई स्किल्स नहीं सीखते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2030 तक 92 मिलियन (9.2 करोड़) नौकरियां AI और ऑटोमेशन के चलते खत्म हो सकती हैं, लेकिन साथ ही 170 मिलियन (17 करोड़) नई नौकरियों का भी सृजन हो सकता है. इसका मतलब साफ है ,एक युग खत्म हो रहा है, लेकिन एक नया युग दस्तक दे रहा है. फर्क सिर्फ इस बात का है कि कौन इस बदलाव के लिए खुद को तैयार करता है.

सबसे ज्यादा खतरा कम-कुशल कामगारों पर

AI और रोबोटिक्स के बढ़ते उपयोग के चलते खासतौर पर वे लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिनकी नौकरियां रिपिटेटिव यानी दोहराए जाने वाले कार्यों पर आधारित हैं. जैसे कि डाटा एंट्री, टेली-कॉलिंग, प्रशासनिक सहायक, क्लर्क आदि. एक आंकड़े के मुताबिक, प्रशासनिक नौकरियों के करीब 46% कार्य AI से स्वतः हो सकते हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि सभी क्षेत्रों में नौकरी का संकट है. तकनीक की इसी तरक्की ने कुछ ऐसे क्षेत्रों को भी जन्म दिया है, जो भविष्य में अत्यधिक संभावनाओं से भरपूर होंगे.

AI, हेल्थकेयर और ग्रीन एनर्जी में उभरते अवसर

AI डेवलपमेंट, डेटा साइंस, रोबोटिक्स इंजीनियरिंग, और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में भारी मांग देखने को मिल रही है. इसके अलावा हेल्थकेयर सेक्टर भी AI को अपनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. इससे स्वास्थ्य सेवा में प्रशासनिक बोझ कम होगा और रोगियों को बेहतर सेवा मिलेगी. इसी तरह, ग्रीन एनर्जी और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में भी कई नई नौकरियों का सृजन हो रहा है , जैसे कि रिन्यूएबल एनर्जी इंजीनियर, EV टेक्नीशियन, और क्लाइमेट एनालिस्ट.

Future of Jobs : भारत के पास है सुनहरा मौका

भारत की 13 करोड़ से ज्यादा की आबादी में करीब 60% युवा हैं. यानी भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा जनसंख्या है. लेकिन एक गंभीर समस्या यह भी है कि ग्रेजुएट्स में से आधे से भी कम को नौकरी मिल रही है. ऐसे में “स्किल इंडिया”, “डिजिटल इंडिया” और “मेक इन इंडिया” जैसे कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर लागू करने की जरूरत और भी अधिक हो जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में शिक्षण, ट्रेनिंग, काउंसलिंग, और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं हैं. AI और ऑटोमेशन के युग में लगातार सीखते रहना ही टिके रहने का सबसे मजबूत तरीका होगा.

बदलती दुनिया में खुद को बदलें

भविष्य का नौकरी बाजार स्किल-बेस्ड होगा, डिग्री-बेस्ड नहीं. ऐसे में जरूरी है कि युवा अपनी काबिलियत को लगातार अपग्रेड करते रहें. चाहे वह AI हो, हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी हो या ग्रीन एनर्जी — जो बदलेगा वही टिकेगा. भारत जैसे युवा देश के लिए यह एक चुनौती जरूर है, लेकिन यदि सही दिशा में कदम उठाए गए, तो यही बदलाव करोड़ों लोगों के लिए नई संभावनाओं का दरवाजा खोल सकता है.

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