काराकाट प्रधानमंत्री की रैली के क्या हैं राजनीतिक मायने…क्या कहता है समीकरण ?

PM Modi LIVE Speech: बीते दिन पीएम मोदी एक सरकारी कार्यक्रम के लिए पटना पहुंचे तो लगे हाथ, हाल ही में पाकिस्तान को उसके नापाक इरादों के लिए सबक सिखाने और आतंकवाद को खत्म करने के लिए भारतीय सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर भारत की सफलता को लेकर जनता से रूबरू हो लिए…जिसकी तस्वीर मिली जुली आई. उसके बाद पीएम ने बिहार के पार्टी नेताओं के साथ बैठक की और फिर आज रोहतास के विक्रमगंज में आज रैली कर रहे हैं…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस रैली का राजनीतिक संदेश तब और गहरा हो जाता है जब वह उस क्षेत्र में आयोजित हो रही हो जहां बीते लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके गठबंधन को करारी शिकस्त मिली हो. बिहार के काराकाट लोकसभा क्षेत्र के विक्रमगंज में पीएम की रैली महज एक चुनावी औपचारिकता तो नहीं लगती बल्कि यह एक संदेश देने की कोशिश प्रतीत होती है जो पार्टी और गठबंधन के खोई हुई ज़मीन को फिर से हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है.

2019 की जीत से 2024 की हार तक का सफर

2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने भोजपुर और मगध के इस इलाके में लगभग पूरी तरह से कब्जा जमा लिया था. NDA ने सासाराम, बक्सर, आरा, औरंगाबाद, जहानाबाद और पाटलिपुत्र जैसी अहम सीटें जीती थीं. उस समय यह क्षेत्र NDA के सामाजिक समीकरण के अनुकूल रहा क्योंकि कोइरी, कुशवाहा, राजपूत, ब्राह्मण और अति पिछड़ी जातियों का समर्थन पार्टी को खुब मिला…लेकिन 2024 में तस्वीर एकदम उलट हो गई. उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी जैसे स्थानीय प्रभावशाली नेताओं के NDA में शामिल होने के बावजूद गठबंधन को करारी हार झेलनी पड़ी. काराकाट में खुद प्रधानमंत्री ने प्रचार किया था, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा तीसरे नंबर पर रहे. यही नहीं, जिस सासाराम लोकसभा में बीजेपी ने उम्मीदवार बदला वहां भी हार हाथ लगी. बक्सर में भी यही हुआ. NDA ने प्रत्याशियों के चयन में जो प्रयोग किए विफल साबित हुए.

हार की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी

मीडिया रिपोर्ट की माने तो लोकसभा में NDA के इस हार की नींव विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान ही पड़ गई थी जब काराकाट लोकसभा (Prime Minister rally ) की सभी विधानसभा सीटों पर NDA हार गया था. तब चिराग पासवान पर भीतरघात के आरोप लगे लेकिन फिर जब लोकसभा 2024 में सभी साथ थे फिर भी जीत नहीं मिली. जो इसारा करता है कि रणनीति , प्रत्याशी चयन में गलती और शायद जमीनी स्तर पर संगठन की पकड़ भी कमजोर हुई है जिससे पार्टी को उसके हिसाब से परिणाम नहीं मिले…

अब PM Modi रैली के क्या मायने?

ऐसे हालात में जब प्रधानमंत्री (PM Modi) विक्रमगंज में रैली कर रहे हैं तो यह न सिर्फ खोई हुई राजनीतिक जमीन को फिर से साधने की कोशिश है, बल्कि उस सामाजिक समीकरण को पुनर्स्थापित करने की भी पहल है जो कभी बीजेपी का मजबूत आधार हुआ करता था. कोइरी और राजपूत बहुल यह इलाका बीजेपी के पारंपरिक सामाजिक समीकरण में फिट बैठता है. लेकिन पिछले दो चुनाव से यह समीकरण टूट चुके हैं और उन्हें जोड़ने का काम आसान नहीं है. प्रशांत किशोर (पीके) जैसे रणनीतिकार मैदान में हैं जिन्होंने अति पिछड़ी जातियों के साथ ब्राह्मण वोट बैंक में भी सेंध लगाने की कवायद शुरू की है. यह समीकरण NDA के लिए खतरे की घंटी है.

PM Modi : सामाजिक समीकरण से आगे की जरूरत

उसके अलावा यह इलाका न केवल सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि औद्योगिक, भौगोलिक और पर्यटन के लिहाज़ से भी बिहार का अहम क्षेत्र है. यूपी और झारखंड की सीमाएं पास हैं, खनिज संपदा, बालू, और व्यापारिक मार्ग इसे विशेष बनाते हैं. लेकिन इन क्षेत्रों का वास्तविक विकास अब तक अधूरा है.
यदि प्रधानमंत्री की यह रैली भावनात्मक और जातिगत कार्ड खेलने में सफल हो जाती है तो शायद उसका असर होगा और पार्टी को सफलता मिल सकती है..विकास, औद्योगिकीकरण, और रोजगार सृजन का वादा इस इलाके को फिर से बीजेपी के पाले में ला सकती हैं. लोकसभा चुनावों की विफलता से सबक लेते हुए अगर इस क्षेत्र को लेकर ठोस घोषणाएं और योजनाएं सामने आती हैं, तभी रैली का असल उद्देश्य सफल हो पाएगा.

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