अब सीटों से आगे की राजनीति..क्या INDIA गठबंधन ने समझ लिया है जीत का फॉर्मूला?

India Alliance : बिहार की राजनीति फिर से करवट लेने को तैयार है। चुनावी सरगर्मियों के बीच अब यह साफ होता जा रहा है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला INDIA गठबंधन न सिर्फ मैदान में उतरने को तैयार है, बल्कि इस बार संगठनात्मक रणनीति और व्यावहारिक समझदारी के साथ आगे बढ़ रहा है। सीट शेयरिंग को लेकर चौथी बार हुई बैठक के बाद गठबंधन के भीतर जो तस्वीर उभरी है, वह इस बार सिर्फ “कोटा सिस्टम” से नहीं, बल्कि विजय संभावनाओं पर आधारित राजनीति की ओर इशारा करती है।

कांग्रेस ने 70 सीटों की मांग कर आरजेडी के सामने अपनी परंपरागत आकांक्षा फिर से रख दी है। पिछले चुनाव में प्रदर्शन बेहद कमजोर रहने के बाद भी यह मांग कितना जायज है और कितने सीटों पर दावेदारी मिलती है यह तो बाद की बात है. कांग्रेस के शीर्ष नेता लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मिलकर अपनी सूची सौंप चुके हैं, लेकिन ये भी स्पष्ट है कि INDIA गठबंधन अब परफॉर्मेंस ओरिएंटेड राजनीति के रास्ते पर है। कांग्रेस को यह स्वीकार करना होगा कि यदि वह कम लेकिन “विजयी” सीटों पर ध्यान केंद्रित करे, तो न केवल गठबंधन को मजबूती मिलेगी, बल्कि पार्टी की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

आरजेडी गठबंधन (India Alliance) की सबसे बड़ी पार्टी है, और जाहिर है कि उसे सीटों में सबसे बड़ा हिस्सा मिलेगा। लेकिन इस बार तेजस्वी यादव का रुख केवल खुद के लिए सीटें सुरक्षित करने वाला नहीं है। उन्होंने मुकेश सहनी और पशुपति पारस जैसे नेताओं को साथ लाने के लिए कांग्रेस और खुद अपनी पार्टी को त्याग करने के लिए तैयार कर लिया है। यही राजनीति की परिपक्वता है, जो तेजस्वी को गठबंधन का नेता तो बनाती ही है, साथ ही यह संकेत भी देती है कि विपक्ष अब “एकजुटता से जीत” की परिभाषा को आत्मसात कर रहा है।

जहां एक ओर मुख्यधारा की पार्टियां सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान में हैं, वहीं सीपीआई माले जैसी पार्टी अपनी ज़मीन पर भरोसा करते हुए अधिक सीटों की मांग कर रही है और सही भी कर रही है। पिछली बार 19 सीटों पर लड़कर 12 जीतने का प्रदर्शन कोई साधारण बात नहीं थी। माले की मांग है कि उन्हें 42 सीटें दी जाएं, हालांकि यह संख्या शायद पूरी न मिले, लेकिन उन्हें पिछली बार से ज्यादा सीटें मिलना तय है। यह साबित करता है कि गठबंधन के भीतर “जमीनी ताकत” को अब वरीयता दी जा रही है।

INDIA गठबंधन ने इस बार कोटा प्रणाली को पीछे छोड़कर “विनेबिलिटी” यानी जीतने की संभावना को केंद्र में रखकर सीटों का बंटवारा करने का जो फैसला लिया है, वह बिहार की राजनीति में नई संस्कृति की शुरुआत हो सकती है। गठबंधन ने न सिर्फ कमजोर प्रदर्शन करने वाले सीटों पर बदलाव की बात की है, बल्कि यह भी तय किया गया है कि बड़े अंतर से हारे उम्मीदवारों को रिप्लेस किया जाएगा।

INDIA गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव में संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता जैसे मुद्दों को अपना हथियार बनाकर लड़ा था, वही एजेंडा अब बिहार में भी दोहराने की तैयारी है। कांग्रेस से लेकर माले, आरजेडी से लेकर वीआईपी और एलजेपी (पारस) सभी पार्टियां अब उस सामाजिक न्याय की छतरी तले एकजुट होती दिख रही हैं, जिसकी जड़ें बिहार की राजनीति में गहरी हैं। तेजस्वी यादव का नेतृत्व अब केवल “युवा चेहरा” होने तक सीमित नहीं, बल्कि वह अब गठबंधन निर्माण, सामंजस्य और समर्पण जैसे मूल्यों को भी साथ लेकर चल रहे हैं।

बिहार में INDIA गठबंधन(India Alliance)  इस बार जीत की असली कुंजी, संगठनात्मक एकता, जीतने की संभावना और सामाजिक न्याय का एजेंडा लेकर उतरने को तैयार है। कांग्रेस, आरजेडी और अन्य दलों के बीच त्याग और सामंजस्य की भावना बनी रही तो यह सिर्फ चुनावी गठबंधन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संस्कृति का पुनरुत्थान होगा। अब देखना यह है कि क्या ये साझेदारी जमीनी स्तर पर वोटों में बदल पाती है या फिर यह भी सिर्फ समझौते की राजनीति बनकर रह जाएगी।

 

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