महागठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय… कितनी सीटों पर किसकी जिम्मेदारी ?

Bihar Elections 2025 : बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और सियासी हलचल तेज हो गई है। जहां एक तरफ एनडीए (NDA) की रणनीति पर काम जारी है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी महागठबंधन (INDIA) में सीटों के बंटवारे को लेकर फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों से लगातार बातचीत और अंदरखाने बैठकों के बाद अब यह साफ होता दिख रहा है कि महागठबंधन के किन घटक दलों को कितनी सीटें मिल सकती हैं।

राजद (RJD) सबसे बड़ा हिस्सेदार

महागठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) एक बार फिर सबसे ज्यादा सीटों पर दावेदारी रख रही है। सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी को 130 से 135 सीटें मिल सकती हैं। पिछली बार यानी 2020 में पार्टी ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 पर जीत दर्ज की थी। वहीं इस बार (Bihar Elections 2025 ) आरजेडी को पशुपति पारस और मुकेश सहनी जैसे सहयोगियों के लिए कुछ सीटें छोड़नी पड़ सकती हैं।

Bihar Elections 2025 : कांग्रेस पर ज्यादा भरोसा नहीं !

कांग्रेस इस बार भी खुद को मजबूत दावेदार मान रही है और 70 सीटों की मांग कर रही है। लेकिन पिछली बार के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए, संभव है कि कांग्रेस को 50 से 60 सीटों के बीच ही संतोष करना पड़े। 2020 में कांग्रेस को 70 सीटें मिली थीं मगर जीत सिर्फ 19 सीटों पर ही मिल पाई थी।

सीपीआई-एमएल (CPI-ML) की बढ़ेगी दावेदारी

लेफ्ट पार्टियों में सीपीआई माले की ताकत बढ़ी है और सीटों की मांग भी। 2020 में माले ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 12 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार माले ने 42 सीटों की मांग रखी है। पार्टी का दावा है कि जमीनी स्तर पर उसकी पकड़ मजबूत हुई है। हालांकि, उसे कितनी सीटें मिलती हैं, यह आरजेडी और कांग्रेस के त्याग पर निर्भर करेगा।

Bihar Elections 2025 : अन्य सहयोगी दल पर कितना भरोसा ?

महागठबंधन में मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और पशुपति पारस की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP – रामविलास गुट) भी शामिल हो सकती है। ऐसे में दोनों दलों को मिलाकर 8 से 10 सीटें दिए जाने का प्रस्ताव बताया जा रहा है। हालांकि सीटों का फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन अंतिम मुहर शीर्ष नेताओं की बैठक में ही लगेगी। कांग्रेस और सीपीआई माले जैसी पार्टियों की मांगें ज्यादा हैं, जबकि आरजेडी के हिस्से में कटौती का दबाव है। ऐसे में अंतिम फॉर्मूले में कुछ बदलाव भी संभव हैं।

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