Opposition response on Operation Sindoor : लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए और विभिन्न मुद्दों पर तीखी आलोचना की. यह चर्चा पहलगाम आतंकी हमले और इसके जवाब में सरकार द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर केंद्रित थी.विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान सरकार पर सुरक्षा चूक,ऑपरेशन की पारदर्शिता, समयबद्धता और कूटनीतिक रणनीति को लेकर तीखा हमला बोला.
पहलगाम हमले की नाकामी और जवाबदेही
विपक्ष की तरफ से चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर हमला करते हुए पूछा कि पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी अब तक गिरफ्त से बाहर क्यों हैं? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवादी पहलगाम जैसे संवेदनशील क्षेत्र तक कैसे पहुंचे और वहां नागरिकों की हत्या कैसे कर पाए. उन्होंने इसे खुफिया तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता करार दिया. वहीं एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पहलगाम हमले की जवाबदेही तय करने की मांग की. उन्होंने पूछा कि इस हमले की जिम्मेदारी किसकी है ? क्या यह खुफिया एजेंसियों की नाकामी थी या सरकार की रणनीति में कमी थी? विपक्षी सांसदों ने तर्क दिया कि पहलगाम जैसे पर्यटन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे थी कि आतंकवादी वहां घुसपैठ कर पाए. उन्होंने सरकार से पूछा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं.
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और पारदर्शिता पर सवाल
चर्चा के दौरान विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर भी संदेह जताया और पूछा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारत को कितना नुकसान हुआ ? उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह ऑपरेशन की सच्चाई को देश के सामने नहीं ला रही है. विपक्ष ने यह भी पूछा कि क्या ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना को कोई बड़ा नुकसान हुआ और यदि हां, तो सरकार इसे क्यों छिपा रही है. विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि ऑपरेशन के दौरान कितने आतंकवादी मारे गए और क्या इसका कोई ठोस सबूत है.इसके साथ-साथ विपक्ष ने ऑपरेशन की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह ऑपरेशन कितना प्रभावी था और क्या यह आतंकवाद को जड़ से खत्म करने में सक्षम था.
ऑपरेशन के समय और गति पर आलोचना
समाजवादी पार्टी सांसद रामशंकर राजभर ने ऑपरेशन सिंदूर के समय पर सवाल उठाया और कहा कि पहलगाम हमले के बाद जनता तत्काल जवाबी कार्रवाई चाहती थी. उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षा थी कि तीन दिन के भीतर कठोर कार्रवाई होगी, लेकिन सरकार ने 17 दिन बाद ऑपरेशन शुरू किया,जो जनता की भावनाओं के खिलाफ था. राजभर ने ऑपरेशन सिंदूर की तुलना में तत्काल और कठोर कार्रवाई की जरूरत पर बल देते हुए इसे “ऑपरेशन तंदूर”की तरह तेज और प्रभावी कार्रवाई की मांग की.उनके अनुसार सरकार का देरी से जवाब देना रणनीतिक कमजोरी को दर्शाता है.
कूटनीतिक मोर्चे पर सरकार की स्थिति
विपक्ष ने सरकार से यह भी पूछा कि पहलगाम हमले के बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कूटनीतिक मोर्चे पर क्या समर्थन मिला. उन्होंने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भारत ने इस हमले को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से उठाया. विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को लेकर सरकार को घेरा, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम में मध्यस्थता की थी. समाजवादी पार्टी के सांसद रामशंकर राजभर ने पूछा कि यदि ट्रंप का दावा सही है, तो भारत की भूमिका क्या थी और क्या भारत ने अपनी संप्रभुता को कमजोर होने दिया. विपक्ष ने तर्क दिया कि यदि ट्रंप का दावा सही है, तो यह भारत की कूटनीतिक नाकामी को दर्शाता है. यदि दावा गलत है, तो सरकार ने इसका खंडन करने में देरी क्यों की. राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान कहा कि सरकार को संसद में कहना चाहिए कि डोनाल्ड ट्रंप झूठ बोल रहे हैं.
सीजफायर पर सवाल
संसद में चर्चा के दौरान विपक्ष ने पूछा कि जब कार्रवाई के दौरान जब भारतीय सेना अच्छी स्थिति में थी, तो सरकार ने पूर्ण युद्ध की रणनीति क्यों नहीं अपनाई. उन्होंने तर्क दिया कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के लिए सरकार को और सख्त कदम उठाने चाहिए थे. उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या यह ऑपरेशन केवल दिखावटी था या इसका कोई दीर्घकालिक प्रभाव होगा.
विपक्ष की रणनीति और प्रभाव
विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को एक साथ जोड़ा. उनकी रणनीति थी कि सरकार को रक्षात्मक स्थिति में आने ना दिया जाए और जनता के बीच यह संदेश जाए कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई में नाकाम रही है. लेकिन चर्चा से ऐन वक्त पहले मुठभेड़ में पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सुलेमान सहित तीन आतंकियों के मारे जाने की खबर ने विपक्ष के हमलों की धार को कुछ हद तक कमजोर किया. इस घटना ने सरकार को यह दावा करने का मौका दिया कि ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की कार्रवाइयां प्रभावी थीं. विपक्ष ने चर्चा के दौरान यह भी सवाल उठाया कि क्या सुरक्षा बलों को पहलगाम जैसे हमलों से निपटने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन दिए गए हैं. चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार से पूछा कि क्या वह आतंकवाद के मूल स्रोत, जैसे सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और फंडिंग, को रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति बना रही है.