25 फीसदी टैरिफ नहीं… ये है भारत-अमेरिका विवाद की असली वजह…!

India us trade war : हमें यह समझना होगा कि आखिर दोनों देशों के बीच असली विवाद किस बात को लेकर है. दरअसल ऐसा नहीं है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते हाल के महीनों में तनावपूर्ण हुआ हो…पहले भी रिश्तों में तनाव  आए है जो महज कूटनीतिक दरवाजे तक ही रह गए… लेकिन अब व्यापार, भू-राजनीति और अप्रवासन जैसे कई मुद्दों पर दोनों देश के मतभेद गहराए जा रहे हैं। खासकर अमेरिका की नई डोनाल्ड ट्रम्प सरकार के बाद से…आइए, समझते हैं कि दोनों देश के बीच मौजूदा विवाद किन-किन मोर्चों पर है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया भर के उन देशों पर समांतर टैरिफ लगाने की बात कही जिन से अमेरिका के व्यापारिक रिश्ते हैं. इसी कड़ी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जुलाई 2025 में भारत पर 25% आयात शुल्क लगाने का एकतरफा ऐलान कर दिया। जो 1 अगस्त 2025 से लागू होने वाला है। अमेरिका का आरोप है कि भारत अपना बाजार कृषि और डेयरी मार्केट में अमेरिकी कंपनियों के लिए नहीं खोल रहा और इसके साथ-साथ उच्च आयात शुल्क की दीवारें खड़ी कर रखी हैं। जो अमेरिका के हित में नहीं है. हालांकि भारत का कहना है कि यह उसकी यह नीति किसान सुरक्षा और स्वदेशी उत्पादन की रक्षा के लिए जरूरी है। थोड़ा पीछे चलते हैं…2023-24 में दोनों देशों के बीच करीब 200 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। इस दौरान भारत ने अमेरिकी तकनीक, ऊर्जा और हथियार खरीदे, वहीं अमेरिका ने भारत को तेल, मक्का और सोया उत्पाद बेचने की कोशिश की. जिसे भारत ने इंकार कर दिया और लेकिन कई कृषि वस्तुओं पर 39% तक का MFN टैरिफ बनाए रखा।

कृषि और डेयरी मार्केट में अमेरिकी कंपनियों के मनाही का फैसला भारत ने अपने देश के किसानों का हितों को देखते हुए लिया. इसके अलावा भारत ने दूसरे रक्षा तकनीक और कच्चा तेल  अमेरिका की तुलना में सस्ते दामों पर दूसरे देश से खरीदने का फैसला लिया. इतना ही नहीं भारत का रूस से करीब होना और BRICS के कारण भी रिश्तों में खटास आई. अमेरिका द्वारा बार-बार रूस से रक्षा और ऊर्जा खरीद पर चेतावनी मिलने के बाद भी भारत ने रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम और कच्चा तेल खरीदा। जिसको लेकर अमेरिका ने दलील दी कि यह उसकी प्रतिबंध नीति (Sanctions) का उल्लंघन है। भारत का रूस के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहा है विशेष रूप से रूसी तेल आयात और रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की तटस्थता, जो अमेरिका पच नहीं रहा है। बीते दिनों अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी और अन्य अधिकारियों ने भारत को रूस के साथ संबंध सीमित करने की सलाह दी थी, जिसे भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के आधार पर खारिज किया। साथ ही, भारत की BRICS और ग्लोबल साउथ में सक्रियता अमेरिका को खटक रही है।  अमेरिका मानता है कि भारत को क्वाड और इंडो-पैसिफिक में उसके साथ रहना चाहिए, न कि वैकल्पिक ब्लॉकों के साथ संतुलन साधना चाहिए।

भारत के लिए कूटनीतिक मोर्चे पर सबसे संवेदनशील मुद्दा है कश्मीर और पाकिस्तान, लेकिन इन दोनों मुद्दों पर अमेरिका का रुख भारत को पसंद नहीं आया क्योंकि पाकिस्तान अमेरिका के जरिए इन मुद्दों को लेकर भारत पर दबाव बनाने की उम्मीद रखता है। हाल ही में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने इस्लामाबाद का दौरा किया और पाकिस्तान को अमेरिका का रणनीतिक साझेदार कहा। इसके अलावा पहलगाम हमला ऑपरेशन सिंदूर जैसे विषयों पर अमेरिका का पाकिस्तान की तरफ झुकाव भी भारत को पसंद नहीं आया क्योंकि भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है। इससे पहले 2021 में अमेरिका ने कश्मीर मसले पर मध्यस्थता की इच्छा जताई थी, जिसे भारत ने अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। समय समय पर अमेरिका ने भारत में प्रेस स्वतंत्रता, धार्मिक सहिष्णुता और अन्य मानवाधिकार मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की है, जिसे भारत ने अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया।

थोड़ा और पीछे चलते हैं..फरवरी 2025 में अमेरिका ने 104 भारतीय नागरिकों को सैन्य विमान में हथकड़ी लगाकर भारत भेज दिया। ये सभी अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। भारत में इसे मानवाधिकार उल्लंघन कहा गया और विपक्ष ने सरकार से कड़ा रुख अपनाने की मांग की। लेकिन सिवाय कुछ भारतीय ट्रैवल एजेंटों पर भी वीज़ा प्रतिबंध लगाने के अमेरिका रुख इस पर भी उदासीन ही रहा. भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करते हुए 2021 में अमेरिका ने अपना  युद्धपोत USS John Paul Jones  भारत के Exclusive Economic Zone (EEZ) में बिना अनुमति ही प्रवेश कर दिया ,भारत ने इसे अपने अधिकारों का उल्लंघन कहा लेकिन अमेरिका ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत Freedom of Navigation ( FON ) बताया। हालांकि यह विवाद शांत है, लेकिन दोनों देश के विश्वास में दरार डाल गया।

जानकारी के लिए बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध 21वीं सदी की एक महत्वपूर्ण साझेदारी के रूप में देखे जाते रहे हैं, लेकिन व्यापार, रूस के साथ संबंध, और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर मतभेद समय-समय पर उभरता रहा हैं। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखने पर जोर देता है, जबकि अमेरिका भारत को अपनी वैश्विक नीतियों के साथ संरेखित करने की कोशिश करता है।

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