Bihar Elections : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ होती जा रही हैं. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सीट बंटवारे का जो खाका तैयार किया है, उससे साफ झलकता है कि गठबंधन एक बार फिर नीतीश कुमार की अगुवाई में मैदान में उतरने को तैयार है. बीजेपी और जेडीयू के बीच बनी आपसी सहमति और छोटे दलों को संतुलन में रखने की कोशिशें राजनीतिक परिपक्वता की मिसाल तो हैं, लेकिन क्या यह संयोजन मतदाताओं को फिर से भरोसा दिला पाएगा?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जेडीयू और बीजेपी दोनों लगभग बराबरी पर चुनाव लड़ेंगे . विधानसभा चुनाव 2025 के लिए जेडीयू को 102-103 सीटें और बीजेपी को 100-102 सीटें मिल सकती हैं. इसका सीधा संकेत है कि एनडीए इस बार भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री चेहरा मानकर ही जनता के बीच जाएगा.
हालांकि यह तो पहले से कहा जा रहा था लेकिन NDA गठबंधन की जो असली चुनौती थी वो छोटे दलों के साथ सीटों के तालमेल में बनाने की थी. क्योंकि चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 40 से अधिक सीटों की मांग कर रही है, जबकि जेडीयू इस पर सहज नहीं है. चिराग को 25-28 सीटें देकर संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है, जो राजनीतिक दृष्टि से व्यावहारिक भी लगता है.
2020 में चिराग की रणनीति ने जेडीयू को भारी नुकसान पहुंचाया था, और 2024 लोकसभा चुनाव में मिली सफलता ने उनकी सौदेबाजी की ताकत भी बढ़ाई है. इसके अलावा जीतन राम मांझी की HAM को 6-7 और उपेंद्र कुशवाहा की RLM को 4-5 सीटें देने की योजना गठबंधन की समावेशी सोच को दर्शाती है. लेकिन यह भी स्पष्ट है कि इन सीटों का बंटवारा जितना राजनीतिक गणित का मामला है, उतना ही यह जमीनी हकीकत और मतदाता समीकरण से भी जुड़ा है.
नीतीश कुमार की अगुवाई को लेकर भी गठबंधन में स्पष्टता दिख रही है. हालांकि उनकी सेहत और भविष्य को लेकर कुछ अटकलें ज़रूर हैं,लेकिन इस विषय में अंतिम निर्णय उन्हीं पर छोड़ना एक परिपक्व राजनीतिक निर्णय है. बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण, विकास के मुद्दे, और क्षेत्रीय संतुलन हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते आए हैं. सीट बंटवारे के इस नए फॉर्मूले से जहां एक ओर NDA के भीतर एकजुटता का संकेत मिलता है, वहीं दूसरी ओर यह गठबंधन के सामने संभावित अंतर्विरोधों और असंतोष के बीज भी बो सकता है.
दूसरी ओर विपक्षी INDIA गठबंधन ने भी तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के नेतृत्व में वोटर अधिकार यात्रा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अभियान को धार देना शुरू कर दिया है. मतदाता सूची में अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर जनजागरूकता फैलाने की यह पहल, विपक्ष को मजबूत जनाधार देने का प्रयास है.