Teacher’s day 2025: भारत को हमेशा से गुरुओं की भूमि कहा गया है हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) मनाया जाता है यह दिन भारत के दूसरे राष्ट्रपति राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर मनाया जाता है । इस खास दिन पर देशभर में शिक्षकों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मान और आदर दिया जाता । भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है , क्योंकि उनके मार्गदर्शन से ही शिष्य जीवन में सही दिशा पाते हैं।
इसलिए इस दिन बच्चों को जरूर यह बताना चाहिए कि भारत की परंपरा में ऐसे अनेक महान शिक्षक हुए हैं जिनके विचार और शिक्षाएं सिर्फ देश ही नहीं पूरी दुनिया को रोशन करती है ।
जिनकी शिक्षा ने दुनिया को दिखाई रहा
1. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन
शिक्षा को जीवन का आधार बनाने वाले भारत के दूसरे राष्ट्रपति और पहले उपराष्ट्रपति केवल राजनेता ही नहीं थे , बल्कि एक महान शिक्षक और दार्शनिक भी थे । उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं है , बल्कि यह चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम होना चाहिए । उनके सम्मान में ही हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है ।
2. गुरु रविदास
15वीं शताब्दी के समाज सुधारक में अपने उपदेशों के समाज में समानता और भाईचारे की नींव रखी थी उन्होंने अपने भजनों और शिक्षाओं के माध्यम से समाज में समानता भाईचारा और मानवता का मार्ग दिखाया था । आज भी उनकी शिक्षा समाज सुधार की नींद मानी जाती है।
3. स्वामी विवेकानंद
युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत और भारतीय संस्कृति के दूत उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को विश्व मंच पर स्थापित किया है । 1893 में शिकागो में उनका भाषण आज भी शिक्षा आत्मविश्वास और जीवन की साल माना जाता है वे युवाओं से कहते थे “उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको”।
4. महर्षि दयानंद सरस्वती
शिक्षा को समाज सुधार का माध्यम बनाने वाले आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेदों के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाया है उन्होंने स्त्रियों की शिक्षा पर जोर दिया और वेद और वेदों के ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत किया ताकि लोग अज्ञानता से बाहर निकल सके । उनके इन विचारों ने आधुनिक भारत में शिक्षा और सामाजिक सुधार की मजबूत नींव रखी थी।
5. डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
भारत के मिसाइल मैन और बच्चों के प्रिय शिक्षक पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक अब्दुल कलाम साहब हमेशा खुद को सबसे पहले शिक्षक मानते थे उनका विश्वास था कि शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा साधन हो सकती है उन्होंने जीवन भर छात्रों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित किया उनका एक छोटा सा संदेश था शिक्षक केवल “पढ़ते ही नहीं बल्कि भविष्य बनाते हैं”।
डॉ राधाकृष्णन , गुरु रविदास, स्वामी विवेकानंद , महर्षि दयानंद सरस्वती और डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम उन महान विभूतियां में शामिल है जिन्होंने समाज में आदर्श स्थापित किया हैं और पीढ़ियों को शिक्षा व जीवन दर्शन की राह दिखा रहे हैं ।