चिराग को गठबंधन धर्म का पाठ पढ़ाने वाले जीतन राम मांझी ने बदला सूर..! चुनाव को लेकर कही बड़ी बात

Bihar vidhan shabha: केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने रविवार को बोधगया स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान आगामी बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी पार्टी का इस बार का लक्ष्य है किसी भी हालत में मान्यता प्राप्त दल बनना. इसके लिए उन्होंने एनडीए से 15 सीटों की मांग की है.

इस बार करो या मरो की स्थिति है

मांझी ने कहा कि पार्टी को बने हुए दस साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यह केवल निबंधित (Unrecognized) पार्टी के रूप में जानी जाती है. उन्होंने इसे अपनी पार्टी के लिए अपमानजनक बताते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि पार्टी को मान्यता प्राप्त दल का दर्जा मिले. उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग की मान्यता पाने के लिए किसी पार्टी को कम से कम 8 सीटों पर जीत और राज्य में डाले गए कुल मतों का 6% हासिल करना अनिवार्य है. मांझी ने कहा कि व्यावहारिक तौर पर यह तभी संभव है जब एनडीए में हमारी पार्टी को कम से कम 15 सीटें दी जाए, क्योंकि हर सीट पर जीत संभव नहीं होती.

अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला

एनडीए में सम्मानजनक हिस्सेदारी न मिलने की स्थिति में मांझी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी और अकेले चुनाव लड़ेगी. उनका दावा है कि बिहार के हर विधानसभा क्षेत्र में उनकी पार्टी के 10 से 15 हजार तक समर्पित वोटर हैं. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी अकेले भी राज्य भर में 6% वोट प्राप्त कर सकती है. हम जमीनी ताकत रखते हैं और भीड़ इकट्ठा करने के लिए पैसे नहीं खर्च करते, हमारी लोकप्रियता खुद भीड़ जुटाती है.

एनडीए में अपनी ताकत का किया दावा

मांझी ने यह भी कहा कि एनडीए नेतृत्व जानता है कि कौन सी पार्टी वास्तव में जिताऊ है. उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि दूसरी पार्टियां भीड़ जुटाने के लिए पैसा खर्च करती हैं,हम बिना पैसे के भी जनसमर्थन पा जाते हैं. यह बात एनडीए नेता भी अच्छी तरह जानते हैं और सीट बंटवारे में इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

माझी के तेवर के क्या है राजनीतिक मायने

जीतन राम मांझी के इस बयान को बिहार की आगामी राजनीति में एक बड़े दबाव रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. एक ओर जहां वे एनडीए में अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प देकर सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं. 2025 के विधानसभा चुनावों में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा किस भूमिका में दिखेगी, यह काफी हद तक सीट बंटवारे और एनडीए नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा. लेकिन इतना तय है कि मांझी ने अभी से चुनावी माहौल को गरमा दिया है

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