भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच पर घमासान, जानें क्यों हो रही है बायकॉट की मांग ?

India vs Pakistan: रविवार को रात 8 बजे दुबई में होने वाले भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच ने एक बार फिर से राजनीतिक,सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों को गरमा दिया है. इस मैच को लेकर भारत में एक विवाद खड़ा हो गया है.आतंकवाद पीड़ितों के परिवार,राजनीतिक दल और नेता पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मुकाबला बायकॉट करने की मांग कर रहे हैं.इस विवाद की जड़ें हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ी हैं,जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में और भी उल्टी आ गई है.

पहलगाम आतंकी हमला और ताजा विवाद

22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के खूबसूरत बैरन घाटी में आतंकवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में 26 लोगों की जान चली गई,जिनमें अधिकांश पर्यटक शामिल थे. इस हमले के बाद देशभर में गुस्सा फैल गया और सरकार ने पाकिस्तान से सभी द्विपक्षीय संबंधों को तोड़ने का फैसला किया. इसके साथ ही सिंधु जल संधि को भी स्थगित कर दिया गया, सरकार का स्पष्ट संदेश था,आतंकवाद और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते. सरकार ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.

इस आतंकवादी हमले के बाद भारत ने मई में सीमा पार आतंकवादियों के ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर नामक सैन्य कार्रवाई शुरू की. इसमें लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिज़्बुल मुजाहिदीन द्वारा इस्तेमाल किए गए आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसके बाद दोनों परमाणु शक्तियों के बीच तनाव बढ़ गया और तीन दिनों तक सैन्य गतिरोध रहा,हालांकि 10 मई को युद्ध विराम की घोषणा की गई.

पाकिस्तान से संबंधों में तनाव

पहलगाम हमलों के संबंध में जुलाई में भारत ने पाकिस्तान का हाथ पकड़ा जब सुरक्षा बलों ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया, जिनके बारे में यह दावा किया गया था कि वे पाकिस्तान से थे. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमारे पास इस बात को स्पष्ट सबूत हैं कि ये तीनों पाकिस्तान के नागरिक थे, उनके पास से पाकिस्तानी मतदाता पहचान पत्र और पाकिस्तान निर्मित राइफलें मिलीं.

इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दल और कई नेताओं ने भारत सरकार की आलोचना शुरू कर दी,यह आरोप लगाते हुए कि सरकार ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की अनुमति देकर आतंकवाद पीड़ितों और सीमा पर शहीद हुए सैनिकों का अपमान किया है.

विपक्षी नेताओं का विरोध

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और महाराष्ट्र में ‘सिंदूर’ नाम से विरोध प्रदर्शन की घोषणा की. उन्होंने कहा, “जब तक आतंकवाद नहीं रुकता,तब तक हमें पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का संबंध नहीं रखना चाहिए. विपक्षी दलों का यह मानना है कि भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच का बहिष्कार दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख को दिखाने का एक अवसर है. उनका तर्क है कि सरकार को क्रिकेट जैसे खेलों को पाकिस्तान के साथ जोड़ने से बचना चाहिए,खासकर जब रिश्तों में इतना तनाव हो.

भारत पाक मैच को लेकर क्या है सरकार का रुख

इस विवाद के बीच, भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के सांसद और पूर्व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने सरकार के रुख का समर्थन किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत पाकिस्तान (India vs Pakistan) के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट नहीं खेलेगा, लेकिन एशिया कप और आईसीसी जैसे बहुपक्षीय टूर्नामेंटों में भाग लेना अनिवार्य है. ठाकुर ने कहा कि अगर हम इस मैच का बहिष्कार करते हैं, तो हमें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ेगा,जिससे अन्य टीमें फायदे में आ जाएगी और अंक मिलेंगे.

पिछले महीने भारत सरकार ने अपनी नई खेल नीति का ऐलान किया था, जिसमें पाकिस्तान के प्रति भारत के रुख को साफ कर दिया गया था. इस नीति में किसी भी द्विपक्षीय खेल संबंध से इनकार किया गया है, यानी भारत न तो पाकिस्तान की मेजबानी करेगा और न ही पाकिस्तान का दौरा करेगा. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय टूर्नामेंटों में भागीदारी की अनुमति दी गई है. नीति में कहा गया है,भारत पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय खेलों में भाग नहीं लेगा, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय और बहुपक्षीय आयोजनों में हम अपनी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारियों का पालन करेंगे.

 वैश्विक खेल आयोजन के पीछे क्या है भारत की महत्वाकांक्षा

भारत की 2030 राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 ओलंपिक खेलों की मेज़बानी की महत्वाकांक्षा भी एक महत्वपूर्ण कारक है. इन आयोजनों को सुरक्षित करने के लिए भारत को ओलंपिक चार्टर का पालन करना होगा,जिसमें देशों के राजनीतिक कारणों से एक-दूसरे को अंतर्राष्ट्रीय खेलों से बाहर करने से रोकता है. इसीलिए सरकार का कहना है कि उसे अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को निभाना पड़ेगा,भले ही वह पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों से बचता हो.

भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट मैच के बहिष्कार को लेकर चल रही बहस इस समय एक ज्वलंत राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दा बन चुकी है. जहां कुछ नेता और समूह इस मैच को पाकिस्तान के साथ रिश्तों में तनाव का प्रतीक मानते हैं, वहीं सरकार और खेल मंत्रालय का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भाग लेना भारत की अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी है. खेल और राजनीति के इस जटिल मिश्रण में अब देखना यह होगा कि सरकार और जनता का रुख किस दिशा में बदलता है.

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