Bihar assembly election 2025:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई है. इस बीच जन स्वराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का एक बयान चर्चा में है. जिसमें से उन्होंने लोगों से कहा कि “नेता पैसा दे तो ले लेना” जनसभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने लोगों से धर्म और जाति के आधार पर वोट न देने की अपील की उन्होंने कहा “चुनाव में नेता आएंगे और तुम्हें पैसे देंगे आप वह ले लीजिए लेकिन, वोट अपनी समझ से दीजिएगा.”
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सवाल
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में लोगों से सवाल पूछे–
राशन कार्ड: 5 साल में राशन कार्ड बनाने के लिए आपने घूस लिया है या नहीं?
जाति प्रमाण पत्र: जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए आपने पैसे लिए या नहीं?
शराब का धंधा: गांव-गांव में शराब ₹100 की ₹300 में बिक रही है
बिजली बिल: बिजली का बिल भी ज्यादा आ रहा है
पुलिस की घूसखोरी: थाने में पुलिस वाले आपके बच्चों को परेशान करके घूस लेते हैं या नहीं?
रणनीतिक राजनीति की समझ
प्रशांत किशोर के इस बयान के पीछे एक गहरी राजनीतिक रणनीति दिखती है. उन्होंने 2 अक्टूबर 2024 को जन स्वराज पार्टी की स्थापना की घोषणा की थी और 1 करोड़ सदस्य होने का दावा किया था.
भ्रष्टाचार पर प्रहार
प्रशांत किशोर का यह बयान वास्तव में व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक तीखा प्रहार है. उनका कहना है कि जब सरकारी काम के लिए घूस देनी पड़ती है, तो चुनाव के समय मिलने वाला पैसा तो वैसे भी जनता का ही है.
चुनावी चुनौतियां
हाल ही में हुए उप-चुनावों में जन स्वराज पार्टी को कोई सीट नहीं मिली, लेकिन किशोर ने 2025 के विधानसभा चुनाव में सभी 243 सीटों पर लड़ने की घोषणा की है.
एक सर्वे के अनुसार, यदि जन स्वराज को 10 प्रतिशत वोट मिले और महागठबंधन के 5 प्रतिशत वोट कटे, तो कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को केवल 34 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं.
प्रशांत किशोर का यह बयान भले ही विवादास्पद लगे, लेकिन इसके पीछे बिहार की राजनीतिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार और वोट बैंक की राजनीति पर गहरी चोट करने का मकसद दिखता है. आगमी चुनाव में किसी रणनीति काम आती हैं ये देखना दिलचस्प होगा.